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| Mahmoud Ahmadinejad, 12 Jan 2008 |
ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर विचार करने के लिए राष्ट्र संघ के पांच स्थायी सदस्यों और जर्मनी के प्रतिनिधियों की बैठक 22 जनवरी को बर्लिन में हो रही है । इन 6 देशों में, जिन्हें पी 5 प्लस 1 कहा जाता है, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं । राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद ने ईरान पर दो प्रकार के प्रतिबंध पहले ही लगा दिए हैं क्योंकि ईरान सरकार ने यूरेनियम संवर्धन गतिविधियां रोकने से इंकार कर दिया है । संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय सामग्री बनाने के लिए किया जा सकता है ।
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम ऐसा खतरा बना हुआ है, जिससे अन्य देशों को निपटना ही होगा ।
“ईरान एक खतरा है और ईरान खतरा बना ही रहेगा अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मिलकर उस देश को परमाणु हथियार बनाने की तकनीक विकसित करने से नहीं रोकेगा । ”
श्री बुश का कहना है कि ईरान सरकार को अपनी नीतियों में परिवर्तन करने और सुरक्षा परिषद की मांगों का पालन करने को प्रेरित करने के लिए आर्थिक दबाव डालना महत्वपूर्ण है ।
“मेरा मानना है कि दबाव, आर्थिक दबाव—आर्थिक प्रतिबंध—ईरान के भीतर लोगों को सोच-विचार कर यह फैसला करने पर मजबूर करेंगे कि उनके लिए संवर्धन करते रहना या विश्व में अलगाव का सामना करना विवेकपूर्ण है या नहीं । देश अपनी हठधर्मिता और सच बताने की अनिच्छा की आर्थिक कीमत चुका रहा है । ”
ईरान पर राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिबंध लगाने की कोशिश के अलावा, अमेरिका ने स्वयं भी कुछ कदम उठाए हैं । उसने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक तेहरान की पहुंच रोकने के लिए कदम उठाए हैं, जिसका इस्तेमाल तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम और आतंकवादी गतिविधियों को धन मुहैया कराने के लिए करता है । अमेरिका अन्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को यह विश्वास दिलाने की मुहिम भी चला रहा है कि उन्हें ईरान के साथ अपना आर्थिक लेन-देन सीमित कर देना चाहिये । जर्मनी, ब्रिटेन, स्विटज़रलैंड और जापान के बैंकों ने ईरान से संबंध तोड़ लिये हैं ।
राष्ट्रपति बुश का कहना है कि ईरानी लोगों को उनकी सरकार गुमराह कर रही है । श्री बुश ने कहा कि “उनकी सरकार के कदमों से अलगाव और आर्थिक गतिहीनता पैदा हो रही है । उन लोगों ने सत्ता में आने पर कहा था कि ‘हम आपको यह आर्थिक लाभ देने का वायदा करते हैं, ’ पर यह लाभ दिये नहीं जा रहे हैं ।” राष्ट्रपति बुश ने कहा कि “अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान सरकार पर दबाव बनाये रखेंगे और मुझे विश्वास है कि हम इस समस्या को राजनयिक स्तर पर सुलझा सकते हैं ।”