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अमेरिका ने ईरान के कुर्दिस्तान प्रांत के एक कानून के छात्र इब्राहिम लोतफल्लाही की मौत की जांच की मांग की है, जिसकी मृत्यु सरकारी हिरासत में हुई थी ।
एक लिखित बयान में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मैककॉर्मेक ने कहा, "अमेरिका कुर्द मूल के ईरानी छात्र इब्राहिम लोतफल्लाही की संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई दुखद मौत के बारे में बेहद चिंतित है, जिसे 6 जनवरी को खुफिया मंत्रालय ने हिरासत में लिया था । हम ईरानी अधिकारियों से इसकी पूर्ण जांच कराने की मांग करते हैं ।"
श्री लोतफल्लाही जब सनंदाज में पायाहम नूर विश्वविद्यालय के परिसर से बाहर आ रहे थे तो उन्हें सुरक्षा बलों ने उठा लिया था । उनका भाई जेल में उनसे मिला था और उसने कहा था कि श्री लोतफल्लाही अच्छी तरह से हैं । उनके परिवार को नहीं मालूम कि उनके खिलाफ अगर कोई आरोप लगाए गए थे तो वे क्या थे । 15 जनवरी को ईरानी अधिकारियों ने उनके परिवार को सूचित किया कि श्री लोतफल्लाही की मौत हो गई है और उन्हें एक स्थानीय कब्रिस्तान में दफना दिया गया है । उन्होंने दावा किया कि श्री लोतफल्लाही ने अपनी कोठरी में आत्महत्या कर ली थी । उनके परिवार को उनका शव देखने की इजाजत नहीं दी गई और वे शव परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं ।
इस मामले में और अक्टूबर में चिकित्सा विज्ञान की एक युवा छात्रा ज़हरा बानी याकूब की मौत में समानताएं हैं । सुश्री याकूब को सुरक्षा बलों ने पश्चिमी शहर हमेदान में गिरफ्तार किया था, जब वह एक पार्क में अपने मंगेतर के साथ टहल रही थी । उसे रात भर जेल में रखा गया, अगले दिन उसका मृत शरीर उसके माता-पिता को दे दिया गया । ईरानी अधिकारियों ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की थी । उसके परिवार का कहना है कि उस पर हमला किया गया था और जेल में उसकी हत्या की गई ।
अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस का कहना है कि मूल लोकतांत्रिक अधिकार सार्वभौमिक होते हैं ।
"पुरुषों और महिलाओं को उन लोगों को चुनने का अधिकार है, जो उन पर शासन करेंगे, उन्हें अपने विचार अभिव्यक्त करने, स्वतंत्रता से पूजा करने और राज्य की निरंकुश ताकतों से सुरक्षा पाने का अधिकार है ।"
इब्राहिम लोतफल्लाही और ज़हरा बानी याकूब की मौतों से ईरान में सत्ता के निरंकुश इस्तेमाल के परिणामों का पता चलता है । जैसा कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता शॉन मैककॉर्मेक कहते हैं, "ईरानी निजाम अपने नागरिकों को डर, शोषण और मनमाने ढंग से गिरफ्तार किये जाने से मुक्त भविष्य से लगातार वंचित रख रहा है ।" श्री मैककॉर्मेक कहते हैं कि अमेरिका ईरान की सरकार से उन सभी व्यक्तियों को रिहा करने के लिए कह रहा है, जिन्हें उचित प्रक्रिया और निष्पक्ष मुकदमे के बिना बंदी बनाया गया है, जिनमें तीन युवा बहाई अध्यापक शामिल हैं, जिन्हें शिराज में खुफिया मंत्रालय के हिरासत गृह में रखा गया है तथा अमीर कबीर विश्वविद्यालय के तीन छात्र भी हैं, जिन्हें जेल के अधिकारियों ने एक ईरानी जज द्वारा दिसंबर के अंत में रिहा किये जाने का आदेश देने के बावजूद छोड़ने से इन्कार कर दिया है ।"