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Editorials - The following is an Editorial Reflecting the Views of the US Government
कश्मीरी विद्रोही नेता मारा गया
29/01/2008

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भारत अधिकृत कश्मीर की पुलिस ने कहा है कि उन्होंने हरकत उल-जिहाद-इ-इस्लामी विद्रोही संगठन के एक उच्च कमांडर को मार दिया है ।

बताया जाता है कि बशीर अहमद, जिसे साभा भी कहा जाता है, डोडा जिले के दूलगाम गांव में अपने छिपने के ठिकाने पर पुलिस का छापा पड़ने के दौरान भागते हुए मारा गया । उसे नवंबर, 2007 में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के तीन शहरों में अदालतों में या उनके पास हुए बम विस्फोटों के लिए जिम्मेदार माना जाता है । उन हमलों में 13 लोग मारे गए थे और करीब 40 लोग घायल हो गए थे ।

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर नियंत्रण को लेकर 1947, 1965 और 1999 में युद्ध हो चुके हैं । भारत-नियंत्रित कश्मीर को पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर से अलग करने के लिए नियंत्रण रेखा बनाई गई थी । 1989 से, भारतीय सुरक्षा बलों और मुस्लिम अलगाववादी गुटों के बीच लड़ाई में हज़ारों लोग मारे गए हैं ।  इनमें से कुछ गुट कश्मीर की आज़ादी के पक्ष में हैं, अन्य कश्मीर को पाकिस्तान के साथ जोड़ना चाहते हैं ।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, हरकत उल-जिहाद-इ-इस्लामी एक सुन्नी मुस्लिम चरमपंथी गुट है, जो पाकिस्तान की चरमपंथी धार्मिक पार्टी जमायत उलेमा-इ-इस्लाम के एक गुट से संबद्ध है । विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गुट मुख्य रूप से पाकिस्तानियों और विदेशी इस्लामवादियों से बना है, जो जम्मू और कश्मीर की आजादी और पाकिस्तान में उसके विलय के लिए लड़ रहे हैं । हरकत उल-जिहाद-इ-इस्लामी ने भारत-नियंत्रित कश्मीर में बहुत सारे हमले किये हैं । यह कश्मीरी उग्रवादी संगठन अल-फरान से जुड़ा है, जिसने जुलाई, 1995 में पांच पश्चिमी पर्यटकों का अपहरण किया था और कथित तौर पर वे सब मारे गए थे ।

2004 से भारत और पाकिस्तान कश्मीर विवाद को हल करने के उद्देश्य से वार्ता कर रहे हैं और अलगाववादी हिंसा में कमी आई है । अमेरिका ने आतंकवादियों और चरमपंथियों का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान और भारत, दोनों के साथ सहयोग बढ़ा दिया है । 2006 में हुए ऐतिहासिक सामरिक भागीदारी समझौते के तहत अमेरिका और भारत संयुक्त रूप से आतंकवाद-विरोधी प्रयास बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "हमें साथ मिलकर आतंकवाद की बुराई का विरोध करना चाहिए ।" राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा कि अमेरिका और भारत बहुजातीय लोकतंत्र, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के शासन की सफलता के लिए प्रतिबद्धता में साझीदार हैं ।