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Editorials - The following is an Editorial Reflecting the Views of the US Government
एक उच्च तालेबान नेता पकड़ा गया
12/02/2008

Undated TV Grab taken from Aljazeera channel, Mullah Mansoor Dadullah talks during an interview at an unknown place
Undated TV Grab taken from Aljazeera channel, Mullah Mansoor Dadullah talks during an interview at an unknown place
पाकिस्तान के सुरक्षा सैनिकों ने तालेबान के एक उच्च नेता मंसूर दादुल्ला को, अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के निकट गोवाल इस्माइल ज़ाल गांव में पकड़ लिया है । बलूचिस्तान प्रांत के पुलिस प्रमुख सऊद गौहर ने कहा “ वह गांव के एक घर में छिपा हुआ      था ।” मंसूर दादुल्ला ने तालेबान का नेतृत्व अपने भाई मुल्ला दादुल्ला की मृत्यु के बाद संभाला था । मुल्ला दादुल्ला को पिछले साल मई में अफ़ग़ान और नेटो सैनिकों ने मार डाला था 

दादुल्ला की गिरफ़्तारी तालेबान के लिये एक और धक्का है जिन पर पाकिस्तानी सुरक्षा सैनिकों और पाकिस्तानी जन मत का दबाव बढ़ता जा रहा है । एक स्वतंत्र संस्था आतंकवाद से मुक्त कलः जन मत केन्द्र के अनुसार केवल चौबीस प्रतिशत पाकिस्तानी अल क़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन को मान्यता देते हैं । मत सर्वेक्षणों से यह संकेत भी मिले हैं कि यदि तालेबान, पाकिस्तान में होने वाले संसदीय चुनावों में भाग लें तो उन्हें केवल तीन प्रतिशत वोट मिलेंगे ।

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में बैतुल्ला मसूद के नेतृत्व वाले तहरीके तालेबान अतिवादी दल ने दक्षिणी वज़ीरिस्तान क्षेत्र में युद्ध विराम घोषित कर दिया है और पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ समझौता वार्तायें करना चाहता है । अमरीकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता टौम केसी ने कहा इस तरह की समझौता वार्ताओं के बारे में  अमरीका की अवस्थिति बिल्कुल स्पष्ट है -

"पहले भी एक समझौता हुआ था जिसे स्थानीय आदिवासी नेताओं ने तैयार किया था । यह समझौता सभी के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये तैयार किया गया था । उद्देश्य था केन्द्रीय प्रशासन वाले आदिवासी क्षेत्र की सभी शक्तियों को इकट्ठा करके वहां के अतिवादियों के विरुद्ध काम करना, चाहे वह तालेबान हो, अल क़ायदा हो या स्थानीय अतिवादी हों । राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सहित सभी व्यक्तियों ने कहा कि वह समझौता कारगर नहीं हो सका । और निश्चित रूप से हम तब तक किसी और तरह का समझौता नहीं करना चाहेंगे जब तक हम यह सुनिश्चित न कर लें कि वह हम सभी के लक्ष्यों को पूरा करने में कितना प्रभावकारी होगा । हम इन विषयों पर पाकिस्तान की सरकार के साथ मिल कर अच्छी तरह काम कर रहे हैं, लेकिन निश्चित रूप से हम ऐसा समझौता नहीं चाहेंगे जिससे उग्रवादियों को फिर से अस्त्रों से लैस होने, सीमा पार गतिविधियां करने या ऐसा कुछ और करने का अवसर मिल जाए जिससे हमारे साझा लक्ष्यों का महत्व कम हो जाए ।”

विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता टौम केसी ने कहा कि तालेबान के विरुद्द लड़ाई केवल अमरीका या अन्य देशों का मामला नहीं है । यह पाकिस्तान की लड़ाई भी है ।