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Editorials - The following is an Editorial Reflecting the Views of the US Government
भारतीय सुरक्षा बलों और माओवादी विद्रोहियों में संघर्ष
20/02/2008

व्यू फ्रॉम वॉशिंगटन =958

भारतीय सुरक्षा बलों और माओवादी विद्रोहियों में संघर्ष

भारतीय सुरक्षा बलों ने पूर्वी राज्यों, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर 30 से ज्यादा माओवादी विद्रोहियों को मार दिया है ।  लड़ाई का नवीनतम दौर तब शुरू हुआ, जब करीब 500 माओवादी विद्रोहियों ने, जिन्हें नक्सलवादी कहा जाता है, उड़ीसा के नयागढ़ जिले में एक पुलिस थाने पर हमला किया । कथित तौर पर 13 पुलिस अधिकारी और कम-से-कम 20 विद्रोही मारे गए । छत्तीसगढ़ राज्य के पुलिस अध्यक्ष, जी. नायक ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के जंगलों में 11 विद्रोही मारे गए हैं ।

भारत में पिछले 20 वर्षों में माओवादी हिंसा में करीब 6,000 लोग मारे जा चुके हैं । भारत सरकार के अनुसार, इनमें से 3,000 से ज़्यादा मौतें 2002 से 2006 के बीच हुईं हैं ।

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माओवादी विद्रोह को देश की “सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती कहा है ।”

 

नक्सलवादी विद्रोहियों का नाम भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के एक गांव, नक्सलबाड़ी पर पड़ा है । 1967 में, कम्युनिस्टों से अलग हुए एक गुट ने चारू मजूमदार और कनु सान्याल के नेतृत्व में सशस्त्र आंदोलन शुरू किया । मजूमदार चीन के कम्युनिस्ट नेता, माओ त्सेतुंग के प्रशंसक थे और माओवादी शैली के विद्रोह की वकालत करते थे । 1980 के दशक तक लगभग 30 नक्लवादी विद्रोही संगठन सक्रिय हो गए थे, जिनके सदस्यों की कुल संख्या कथित तौर पर करीब 30,000 थी । 2006 में, भारत के गृह मंत्री, शिवराज पाटिल ने कहा कि 9,000 से ज़्यादा नक्सलवादी विद्रोही सक्रिय हैं ।

आतंकवाद पर अपनी रिपोर्ट में, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 2006 के दौरान, नक्सलवादी (माओवादी किसानों का आंदोलन)  आतंकवाद, जो पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े क्षेत्रों में फैला हुआ था, अधिक उन्नत और घातक हो गया । रिपोर्ट में कहा गया है कि “नक्सलवादियों ने कई उच्च-स्तरीय हमले किये, जिससे विद्रोह की साख बढ़ी, और उन्होंने ज़्यादा बड़े ग्रामीण इलाके पर नियंत्रण कर लिया ।”

 

आतंकवाद-विरोधी सहयोग को सुगम बनाने के लिए, अमेरिका और भारत ने 2000 में एक संयुक्त कार्य दल की स्थापना की । आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ अमेरिकी सरकार और सेना का सहयोग बढ़ता जा रहा है ।