(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
चीन सरकार ने स्वीकार किया है कि उसने सोमवार को ल्हासा में तिब्बती भिक्षुओं को गिरफ्तार कर लिया, जो तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ हुए आंदोलन की वर्षगांठ मनाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे ।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किन गांग ने कहा कि सोमवार को ल्हासा में हुआ प्रदर्शन गैरकानूनी था, जिससे सामाजिक स्थिरता को खतरा था ।
उन्होंने कहा कि आंदोलन में भाग लेने वाले भिक्षुओं को कोई जानकारी नहीं थी और वे मुट्ठी भर अन्य लोगों के बहकावे में आ गए थे । उन्होंने यह नहीं बताया कि ये अन्य लोग कौन हैं । उन्होंने कहा कि चीनी अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए गैरकानूनी गतिविधियों का मुकाबला करते रहेंगे ।
10 मार्च को असफल तिब्बती आंदोलन की 49वीं वर्षगांठ थी, जिसे चीनी सेना ने कुचल दिया था । इसके बाद तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा भाग कर उत्तरी भारत में निर्वासन में रहने चले गए थे ।
मीडिया की खबरों में कहा गया है कि इस घटना की याद में कई सौ तिब्बती भिक्षुओं ने ल्हासा में एक अभूतपूर्व प्रदर्शन मार्च में हिस्सा लिया था । वे पिछले अक्टूबर में गिरफ्तार किये गए भिक्षुओं को रिहा करने की मांग भी कर रहे थे । दलाई लामा को वॉशिंगटन में कांग्रेशनल गोल्ड मेडल पुरस्कार दिये जाने के कुछ समय बाद इन भिक्षुओं को गिरफ्तार किया गया था ।
चीनी प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि सोमवार को हुई धर-पकड़ के बाद कुछ बौद्ध भिक्षुओं को हिरासत में लिया गया था । उसने कहा कि उन पर चीनी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है ।
उसने तिब्बत में चीन की मौजूदगी की फिर से वकालत की । उसने कहा कि चीन ने तिब्बतियों को सामंती परंपरा से छुटकारा दिलाने में मदद की है और वहां का जीवन स्तर ऊंचा करने में सहायता की है ।
दलाई लामा ने सोमवार को वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि तिब्बत में चीनी दमन जारी है । उन्होंने कहा कि इस दमन में मानवाधिकार हनन, धार्मिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश और धार्मिक मुद्दों का राजनीतिकरण शामिल है ।