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तिब्बत की ओर मार्च कर रहे तिब्बती प्रदर्शनकारी भारतीय पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से निराश

13/03/2008

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(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)

भारतीय पुलिस ने इस हफ्ते के शुरू में करीब 100 तिब्बती निर्वासितों को गिरफ्तार कर लिया, जो भारत से अपने देश के लिए विरोध मार्च पर निकले थे । यह मार्च तिब्बती कार्यकर्ताओं द्वारा बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले चीनी शासन से तिब्बत को आजाद कराने के अपने संघर्ष पर ध्यान आकर्षित करने के लिए दुनिया भर में चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है ।

 

तिब्बती कार्यकर्ता तिब्बत के लिए अपनी निर्धारित पदयात्रा के लिए करीब 50 किमी तक चले थे, जब पुलिस ने गुरुवार की सुबह हिमाचल प्रदेश के शहर देहरा में उन्हें गिरफ्तार कर लिया और वैन में ले गई ।

 

तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष त्सेवांग रिगज़िन ने कहा कि मार्च शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसे रोके जाने से हमें आघात लगा है ।

 

श्री रिगज़िन ने कहा कि हम बहुत निराश हैं कि भारतीय पुलिस ने आज सुबह 6.40 बजे हमारे कार्यकर्ताओं को रोक दिया । जब पुलिस आई और हमें रोका तो सभी प्रदर्शनकारी सड़कों पर बैठ गए और वे वहां से हिले नहीं । वे सब प्रार्थनाएं कर रहे थे और फिर पुलिस जबरन सारे प्रदर्शनकारियों को बस में भर कर ले गई ।

 

भारतीय पुलिस ने सोमवार को मार्च शुरू होने के कुछ देर बाद ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी । नई दिल्ली ने लाखों तिब्बती शरणार्थियों को शरण दी हुई है, लेकिन वह उन्हें चीन-विरोधी सार्वजनिक प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं देती ।

 

मार्च के संयोजकों में से एक, रिगज़िन ने कहा कि यह अहिंसक प्रदर्शन था और इसे आगे बढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए थी ।

 

उन्होंने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि तिब्बत की ओर हमारा मार्च पूरी तरह अहिंसक है । हमने रास्ते में किसी के लिए कोई समस्या खड़ी नहीं की है । हम तो मुट्ठी भर शांतिपूर्ण भिक्षु और भिक्षुणियां तथा कुछ साधारण लोग हैं । हम तो बस सड़क किनारे मार्च कर रहे थे और कोई अपराध नहीं कर रहे थे, इसलिए मार्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए ।

 

तिब्बती कार्यकर्ताओं का कहना है कि मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना उनके विरोध की राह में पहली बड़ी बाधा है । उन्होंने छह महीने के भीतर तिब्बत की राजधानी ल्हासा पहुंचने का रास्ता तलाश करने का संकल्प किया है ।

 

तिब्बती प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मातृभूमि पर चीन ने अवैध कब्जा किया हुआ है और वह उसे छुड़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं । अगस्त में होने वाले बीजिंग ओलंपिक खेलों से पहले तिब्बती निर्वासित संगठन दुनिया भर का ध्यान अपने संघर्ष की ओर खींचने के लिए कई तरह के आंदोलन आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से एक तिब्बत तक मार्च करना है ।

 

चीन का कहना है कि 1951 से उसका तिब्बत पर नियंत्रण है और यह उसकी भूमि का अभिन्न हिस्सा है । तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और तिब्बती शरणार्थी चीन पर इस क्षेत्र में व्यापक मानवाधिकार हनन का आरोप लगाते हैं ।

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