(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
नेपाल सरकार ने ऐलान किया है कि वह मई के शुरू में चीन की ओलंपिक मशाल दौड़ के दौरान हिमालय पर्वत के अपनी तरफ के रास्ते बंद कर देगा । इस समाचार से वे पर्वतारोही नाराज हैं, जो कुछ ही हफ्तों में अपना अभियान शुरू करने वाले थे ।
कई दिनों के कयासों के बाद नेपाल के पर्यटन मंत्री ने पुष्टि कर दी है कि 1 से 10 मई के बीच हिमालय पर्वत का दक्षिणी हिस्सा बंद कर दिया जाएगा ताकि चीन की ओलंपिक मशाल की शिखर तक दौड़ के लिए रास्ता साफ रहे ।
विश्व का यह सबसे ऊंचा पर्वत दोनों देशों की सीमा पर स्थित है और हर साल पर्वतारोही इसके शिखर पर किसी भी ओर से चढ़ने के लिए हजारों डॉलर देते हैं ।
चीन सरकार ने पिछले महीने नेपाल से गुप्त रूप से दक्षिणी मार्ग बंद करने के लिए कहा था । यह घोषणा उस समय की गई है, जब ल्हासा के मठों में प्रदर्शन बढ़ रहे हैं ।
चीन का कहना है कि वह ज्यादा भीड़-भाड़ और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित है, लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन सरकार शायद मशाल दौड़ के दौरान तिब्बत-समर्थक प्रदर्शनों से डरती है ।
पर्वतारोहियों ने हिमालय की चढ़ाई शुरू करने से केवल तीन हफ्ते पहले यह घोषणा किये जाने की आलोचना की है ।
पेंबा दोरजी शेरपा ने हिमालय पर्वत पर तेजी से चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया है । उनका कहना है कि चीन की ओर से मशाल दौड़ आयोजित करने से नेपाल के पर्वतारोहण मौसम में कोई बाधा नहीं पड़नी चाहिए ।
शेरपा ने कहा कि नेपाल को इसकी परवाह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि चीन ओलंपिक खेलों की वजह से अपना मार्ग बंद कर रहा है और इसका असर नेपाल पर नहीं पड़ना चाहिए । उन्होंने कहा कि नेपाल को चीनी कारण से अपने चढ़ाई के मार्ग बंद नहीं करने चाहिए ।
8,848 मीटर ऊंचे शिखर पर चढ़ने का सर्वोत्तम समय मई के मध्य से लेकर अंत तक होता है, लेकिन पर्वतारोहियों को इसके अनुकूल बनने के लिए कई हफ्ते पर्वत पर बिताने पड़ते हैं । इसके अतिरिक्त उनका मार्गदर्शन करने वाले विशेष गाइड अगले हफ्ते इन पर्वतारोहियों के लिए रस्सियां और सीढ़ियां बिछाने वाले थे, क्योंकि इसके लिए पर्वतारोही उन्हें पैसा देते हैं ।
पिछले साल मशाल दौड़ के पूर्वाभ्यास में तिब्बत-समर्थक कार्यकर्ताओं ने बाधा डाली थी, जिन्होंने झंडा फहराया था और भाषण दिये थे, लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें चीनी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था ।