(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
चीन इन गर्मियों में बीजिंग में होने वाले ओलंपिक खेलों के जरिये स्वयं को एक आधुनिक विश्व शक्ति के रूप में दिखाना चाहता है । परंतु इन खेलों के कारण देश के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भी ध्यान आकर्षित हो रहा है । हाल ही में बीजिंग ने तिब्बत में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने का प्रयास किया और इस मुद्दे पर भी न केवल मानवाधिकार संगठन, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय जगत की प्रसिद्ध हस्तियां भी उसकी आलोचना कर रही हैं । हांगकांग में वी.ओ.ए संवाददाता, क्लॉडिया ब्लूम ने मानवाधिकार संगठनों से पूछा कि इन प्रदर्शनों का किस तरह का प्रभाव पड़ेगा और चीन उनसे कैसे निपट रहा है ।
आइसलैंड की गायिका ब्योर्क ने इस महीने के शुरू में शंघाई में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा कर दिया, जब अपने गीत "डिक्लेयर इंडिपेंडेंस" (आजादी की घोषणा करो) के दौरान बार-बार "तिब्बत-तिब्बत" का नारा लगाया ।
चीन का सांस्कृतिक मंत्रालय इस घटना से बहुत नाराज हुआ और उसने घोषणा कर दी कि वह विदेशी गायकों और कार्यक्रमों पर नियंत्रण कड़े कर देगा ।
चीन में विदेशी कलाकारों पर प्रतिबंध नए नहीं हैं । उदाहरण के लिए, जब 2006 में रोलिंग स्टोन्स नाम के गुट ने देश में अपना कार्यक्रम पेश किया था तो चीनी अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में उनके कई गानों पर प्रतिबंध लगा दिया था । परंतु ब्योर्क की तिब्बत पर की गई टिप्पणी से बीजिंग और अधिक घबराया हुआ लग रहा है ।
पिछले हफ्ते शंघाई में अमेरिका के जैज़ पियानो वादक हैरी कोनिक जूनियर को अपने कार्यक्रम में अंतिम क्षणों में मजबूरन कुछ परिवर्तन करने पड़े थे, क्योंकि गलती से उनके गानों की एक पुरानी सूची चीनी अधिकारियों को दे दी गई थी । उन्होंने जोर दिया कि श्री कोनिक वही गाने बजा सकते हैं, जो सूची में हैं, हालांकि उनके बैंड के पास इनमें से ज्यादातर गानों के लिए संगीत तैयार नहीं था ।
चीन में मानवाधिकार निदेशक शेरॉन होम का कहना है कि बीजिंग यह तो चाहता है कि विदेशी कलाकार चीन में कार्यक्रम प्रस्तुत करें, लेकिन अधिकारी यह स्पष्ट कर देते हैं कि कुछ मुद्दों को छुआ नहीं जा सकता ।
चीन ताइवान के स्वशासित द्वीप को अपने इलाके का हिस्सा मानता है और ताइवान सरकार द्वारा औपचारिक रूप से आजादी की घोषणा करने के किसी भी कदम का विरोध करता है । बीजिंग तिब्बत की आजादी की मांग भी ठुकरा देता है । इस क्षेत्र पर उसने 1951 में कब्जा कर लिया था । वह यह भी नहीं चाहता कि 1989 में तियेनअनमन चौक में हुए लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के दमन के बारे में चर्चा की जाए ।
ओलंपिक खेलों से पहले अंतर्राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं ने चीन के मानवाधिकार हनन की आलोचना तेज कर दी है । उन्होंने चीन द्वारा असंतोष को कुचलने, मीडिया स्वतंत्रता के अभाव और तिब्बतियों के दमन के आरोपों जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है । इसके अलावा, कार्यकर्ता चीन की कुछ विदेश नीतियों की भी आलोचना करते हैं, खासकर सूडान के दारफूर क्षेत्र में हिंसा खत्म कराने में मदद न करने की नीति की ।
ह्यूमन राइट्स वॉच के हांगकांग के शोधकर्ता फेलिम काइन का कहना है कि उन्हें आशा है कि विश्व की प्रसिद्ध हस्तियों पर ओलंपिक खेलों से पहले इस बारे में बोलने का दबाव बढ़ता जाएगा । उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में चीन ने तिब्बत में प्रदर्शनों को जिस तरह से कुचला है, उससे चिंताएं बढ़ सकती हैं ।
ओलंपिक दिशा-निर्देशों के तहत खिलाड़ी खेल प्रतियोगिताओं के दौरान राजनीतिक बयानबाजी नहीं कर सकते । परंतु श्री काइन ने कहा है कि खिलाड़ियों के बीच चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड के बारे में चिंताएं बढ़ने की खबरें आई हैं और यह भी कहा जा रहा है कि कुछ खिलाड़ी खेलों का बहिष्कार करने के बारे में विचार कर रहे हैं ।
एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठनों ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति और ओलंपिक खेलों को प्रायोजित करने वाली कॉर्पोरेट कंपनियों से चीन पर अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड सुधारने के लिए दबाव डालने को कहा है ।