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| Tibetan exiles shout slogans during a protest march in Dharmsala, India. |
भारत ने चीन को यह आश्वस्त किया है कि तिब्बत मुद्दे पर उसका रुख स्पष्ट एवं पहले की तरह है । चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीजिंग में कहा कि भविष्य में भी इस रुख में कोई परिवर्तन नहीं होगा ।
चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता किन गांग ने कहा कि भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की धर्मशाला स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार के नेता दलाई लामा से मिलने की कोई योजना नहीं है । उल्लेखनीय है कि इस तरह की मुलाकात की अटकलें लगाई जा रही हैं ।
चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने श्री किन के हवाले से कहा है कि भारत सरकार ने इस तरह की मुलाकात के अफवाह पर स्थिति स्पष्ट कर दी है । भारत की तरफ से कहा गया है कि ऐसी मुलाकात की कोई योजना नहीं है ।
उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने बीजिंग को आश्वस्त किया है कि तिब्बत पर उसका रुख स्पष्ट और पहले की तरह बरकरार है और यह भविष्य में भी नहीं बदलेगा । उल्लेखनीय है कि भारत तिब्बत को चीन का आंतरिक मामला मानता है ।
चीन तिब्बत में उत्पन्न अशांति से निपटने में लगा है । तिब्बत में इस महीने के शुरू में बीजिंग की सत्ता के खिलाफ भिक्षुओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगे भड़क उठे । इससे चीन का साम्यवादी नेतृत्व हिल गया है । पिछले दो दशकों के दौरान हुए इस सबसे तीखे विरोध प्रदर्शनों में कम-से-कम 19 लोग मारे गए हैं । इनमें 18 नागरिक एवं एक पुलिस अधिकारी शामिल हैं ।
दलाई लामा से पश्चिमी देशों के नेताओं की मुलाकात से चीन भड़क उठा है । चीन ने इन देशों पर ल्हासा में हाल में हुए दंगों की योजना का आरोप लगाया है । चीन ने चेतावनी दी है कि इन देशों के इस कदम से द्विपक्षीय रिश्तों को झटका लगेगा ।
शुक्रवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पैलोसी ने धर्मशाला आकर दलाई लामा से मुलाकात की और तिब्बत में चीन के दमन को आड़े हाथों लिया । इससे चीन भड़क उठा है । चीन ने कहा है कि उसके आंतरिक मामलों में दूसरे टांग न अड़ाएं तो उनके लिए अच्छा होगा ।
चीन ने तिब्बत के सवाल पर भारत के रुख की सराहना की है । चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने खुद तिब्बत में आजादी के लिए हो रही गतिविधियों के सवाल पर भारत सरकार के रुख की सराहना की है ।