(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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| Condoleezza Rice (file photo) |
अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने चीन से तिब्बत के प्रति अपनी नीति पर फिर से विचार करने एवं तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा से बातचीत करने की अपील की है । विदेश मंत्रालय से वी.ओ.ए के केंट क्लीन की रिपोर्ट-
सुश्री राइस ने विरोध करने वालों और चीनी अधिकारियों के बीच संघर्ष के शांतिपूर्ण निदान की अपील की है । उन्होंने कहा है कि दलाई लामा इसमें मददगार साबित हो सकते हैं । उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि अहिंसा में विश्वास, तिब्बत के लिए राजनीतिक आजादी नहीं मांगने के उनके घोषित रुख एवं उनकी नैतिक हैसियत को देखते हुए यह लगता है कि दलाई लामा इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं । तिब्बतियों पर दलाई लामा के दमदार प्रभाव को कोई चुनौती नहीं है । दलाई लामा का प्रभाव न सिर्फ तिब्बत के लोगों पर है, बल्कि पूरी दुनिया के लोग भी उनका सम्मान करते हैं ।
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| Indian External Affairs Minister Pranab Mukherjee |
भारतयी विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से सोमवार की सुबह विदेश मंत्रालय में मुलाकात के बाद सुश्री राइस ने पत्रकारों से कहा कि तिब्बत में हिंसा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और चीन को क्षेत्र में ऐसी नीति अपनानी चाहिए, जो स्थायी रूप से चल सके ।
मुखर्जी इस बात पर सहमत हुए कि अगर बातचीत में दलाई लामा को शामिल किया जाता है तो वे मददगार साबित हो सकते हैं । भारत के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में अनुमानतः 1.8 लाख तिब्बती रह रहे हैं और उन्हें अपनी मर्जी के अनुसार, धर्म के पालन का अधिकार है । लेकिन उन्होंने आगाह किया कि उन्हें भारत में राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहना चाहिए । उन्होंने कहा कि वे अपना धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियां जारी रख सकते हैं, लेकिन हमारे कानून के अनुसार, उन्हें किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधियां चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि भारत के नागरिक भी ऐसी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते, जो किसी भी दोस्त देश के खिलाफ हो, या जिससे भारत और दूसरे किसी देश के बीच रिश्ते पर आंच आए ।
भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार ने कहा है कि लड़ाई में 130 लोग मारे जा चुके हैं । चीन सरकार ने मरने वालों की आधिकारिक संख्या 19 बताई है । फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सर्कोज़ी सहित दुनिया के कई नेताओं ने तिब्बत में उत्पन्न स्थिति के शांतिपूर्ण निदान की अपील की है ।
तिब्बत की राजधानी ल्हासा में 14 मार्च को चीनी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया । यह संघर्ष अब चीन के दूसरे भागों में फैल गया है ।
श्री मुखर्जी ने तिब्बत के अलावा अन्य मामलों पर भी अपने विचार रखे । उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौता देश में इस मसले पर उत्पन्न राजनीतिक विवादों के चलते रुका हुआ है । वॉशिंगटन की यात्रा के दौरान श्री मुखर्जी ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बुश से निजी मुलाकात का कार्यक्रम भी तय किया है ।