(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने मंगलवार को अपने राजनीतिक विरोधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई ।
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| Yousaf Raza Gilani |
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दो उच्च अधिकारी भी यहां हैं और उन्होंने संकटग्रस्त राष्ट्रपति तथा नए सरकारी नेताओं से बातचीत की ।
आज राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने गंभीर मुद्रा में नए प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को पद की शपथ दिलाई, जो श्री मुशर्रफ के शासनकाल में जेल में चार वर्ष से अधिक समय बिता चुके हैं । श्री गिलानी के शपथ ग्रहण करने के बाद उनके कुछ समर्थकों ने "भुट्टो जिंदाबाद" के नारे लगाए । अगर पिछले साल 27 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या नहीं होती तो संभव है कि वह प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रही होतीं ।
पिछले महीने हुए चुनावों में उनकी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को सहानुभूति की लहर के चलते जीत हासिल हुई । एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पार्टी ने, जो दूसरे नंबर पर रही, मुशर्रफ-विरोधी गठबंधन बनाने के लिए स्वर्गीय भुट्टो की पार्टी से हाथ मिला लिया ।
पाकिस्तान में नई राजनीतिक परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिका के साथ भविष्य में सहयोग जारी रखने पर संदेह पैदा हो गया है । श्री मुशर्रफ अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी अभियान में वॉशिंगटन के कट्टर सहयोगी रहे हैं ।
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| Richard Boucher |
पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि दो अमेरिकी उच्चाधिकारी, उप विदेश मंत्री जॉन निग्रोपोंटे और दक्षिण तथा मध्य एशियाई मामलों के लिए सहायक मंत्री रिचर्ड बाउचर ने राष्ट्रपति मुशर्रफ के साथ 90 मिनट बिताए ।
अमेरिकी अधिकारी प्रधानमंत्री गिलानी से भी बातचीत करेंगे । इससे पहले वह श्री शरीफ से मिले, जो नए गठबंधन के महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं । उन्होंने बताया कि उन्होंने अमेरिकी राजनयिकों से कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ अब पाकिस्तान की ओर से वॉशिंगटन को कोई गारंटी नहीं दे सकते, क्योंकि एक व्यक्ति के शासन का युग समाप्त हो गया है ।
श्री शरीफ ने कहा कि मैंने उन्हें स्पष्ट बता दिया कि श्री मुशर्रफ को हम असंवैधानिक राष्ट्रपति, गैर-कानूनी राष्ट्रपति समझते हैं, जिन्हें पाकिस्तान के लोगों का समर्थन हासिल नहीं है ।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में श्री मुशर्रफ ने जो फैसले लिये, वे पूर्व सेनाध्यक्ष के निजी हितों को बढ़ावा देने के लिए थे, लेकिन अब राष्ट्रीय नीति संसद द्वारा बनाई जाएगी ।
नई सरकार और राष्ट्रपति के बीच न्यायपालिका को लेकर टकराव होने की संभावना है । गठबंधन ने उन न्यायाधीशों को बहाल करने का वायदा किया है, जिन्हें पिछले साल राष्ट्रपति ने बर्खास्त कर दिया था । परंतु उनके स्थान पर सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किये गए न्यायाधीशों ने अपने पूर्ववर्तियों की बर्खास्तगी को संवैधानिक करार दिया है ।
संसद द्वारा चुने जाने के बाद नए प्रधानमंत्री ने तुरंत अपदस्थ न्यायाधीशों को रिहा कर दिया था, जो चार महीने से भी ज्यादा समय से नजरबंद थे ।