(वी.ओ.ए न्यूज़)
आज सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार को 2002 में गोधरा में हुई हिंसा से संबंधित 14 मामलों की जांच करने के लिए सीबीआई के पूर्व अध्यक्ष आर.के राघवन की अध्यक्षता में 5 सदस्यों की विशेष जांच टीम का गठन करने के लिए 10 दिन का समय दिया ।
न्यायमूर्ति अरिजित पसायत की अध्यक्षता में खंडपीठ ने कहा कि विशेष जांच टीम इन मामलों की और अधिक जांच करेगी । उन्होंने राज्य सरकार को इस टीम की रिपोर्ट तीन महीने के भीतर एक बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया है ।
अदालत ने यह आदेश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, गैर-सरकारी संगठनों और कुछ व्यक्तियों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर दिया है, जिनमें दंगे के मामलों की सुनवाई गुजरात से बाहर कराने और इसकी आगे जांच कराने या सीबीआई द्वारा फिर से जांच कराने की मांग की गई थी ।
ये याचिकाएं सुनवाई के दौरान कई गवाहों के अपने बयान से पलट जाने के बाद दायर की गई थी । यह कहा गया था कि गवाहों के अपने बयान से मुकरने का कारण उन्हें मिली धमकियां, दबाव या लालच था ।
जिन मामलों की जांच फिर से की जाएगी, उनमें वह मामला भी शामिल है, जिसमें गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस रेल को आग लगाने के मामले में दर्ज एफआईआर में मोहम्मद रफुद्दीन अंसारी और एक अन्य व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है । इस मामले में 59 लोग मारे गए थे ।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विशेष जांच टीम इन मामलों की जांच करने के लिए अपने तरीके इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र होगी ।
इस टीम में श्री राघवन के अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक सी.डी सत्पथी और गुजरात के तीन पुलिस अधिकारी- गीता जौहरी, आशीष भाटिया और शिवानंद झा होंगे । गीता जौहरी विशेष जांच टीम की समन्वयक होंगी ।
पुलिस अधिकारी गीता जौहरी ने 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी के पुलिस द्वारा एक फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने की जांच का नेतृत्व किया था और जांच टीम से हटाए जाने के बाद वह विवाद के घेरे में आ गई थीं । कथित तौर पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर उन्हें जांच टीम से हटाया गया था ।