(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
बर्मा की सैनिक सरकार के अध्यक्ष, जनरल थान श्वे ने कहा है कि उनका इरादा 2010 में सरकार का नियंत्रण चुनाव जीतने वाले पक्ष को सौंपने का है । परंतु बर्मा में विपक्ष के सदस्यों को संदेह है कि सेना नागरिक शासन को आने देगी । वी.ओ.ए संवाददाता लुइस रमिरेज़ ने बैंकॉक में हमारे दक्षिण-पूर्व एशिया ब्यूरो से खबर भेजी है ।
बर्मी सैन्य शासक थान श्वे गुरुवार को देश के सशस्त्र फौज दिवस के अवकाश पर राष्ट्रीय टेलीविजन पर आए ।
मई में संवैधानिक जनमत संग्रह कराया जाना है, जिससे 2010 में बहुदलीय चुनावों का रास्ता खुल जाएगा और जनरल ने कहा है कि तब सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा ।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को सत्ता का लालच नहीं है और उसका उद्देश्य देश का विकास करना है ।
परंतु बर्मा के विपक्षी सदस्यों ने संदेह जताया है कि सेना का नागरिकों को सत्ता सौंपने का कोई इरादा है । अनुभवी विपक्षी राजनेता थाकिन चान टुन ने संकेत दिया कि संभवतः जनरल थान श्वे, जो अब 77 वर्ष के हैं, के पास 2 वर्षों बाद अपनी आयु और स्वास्थ्य के कारण सत्ता छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं होगा । परंतु उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सेना सत्ता छोड़ देगी ।
उन्होंने कहा कि सैन्य नेताओं ने जो संविधान बनाया है, उसके मूल सिद्धांत सेना को संसद पर और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर अधिकतम नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति देते हैं । उन्होंने कहा कि अगर थान श्वे अपना पद छोड़ दें तो भी सेना इस देश पर शासन करती रह सकती है ।
बर्मा में 1962 में हुई क्रांति के बाद से यहां सेना का शासन रहा है । सेना ने बर्मी अर्थव्यवस्था के लगभग हर पहलू पर नियंत्रण कर लिया है और जो दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे विविध और समृद्ध देश था, वह अब सबसे गरीब देशों में से एक हो गया है । प्राकृतिक गैस, लकड़ी और अन्य संसाधनों से सम्पन्न होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय 240 डॉलर प्रति वर्ष से भी कम है ।
पिछले साल ईंधन की कीमतों में वृद्धि होने पर हजारों बौद्ध भिक्षुओं और अन्य लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किये थे और वे सुधारों की मांग कर रहे थे । सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए बल प्रयोग किया और आंदोलन में भाग लेने के संदेह में गिरफ्तार किये गए लोगों को जेलों में डाला हुआ है । राष्ट्र संघ के अधिकारियों का कहना है कि इस दमन में 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे । अन्य लोगों का कहना है कि यह संख्या कहीं अधिक है ।
अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अन्य सदस्यों ने बर्मी नेताओं से वास्तविक लोकतांत्रिक सुधार करने और विपक्षी नेता आंग सान सू ची सहित, जो वर्षों से नजरबंद हैं, अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने के लिए कहा है ।
बर्मी नेताओं ने लोकतंत्र का रोड मैप बनाया है, जिसके तहत संविधान के प्रारूप को मंजूरी दी गई है, जिस पर मई में मतदान कराया जाएगा । वॉशिंगटन ने इस जनमत संग्रह को छलावा बताया है, क्योंकि इसका प्रारूप सैन्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की चुनी हुई समिति ने एक बंद प्रक्रिया में बनाया था ।