(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
चीन के अधिकारियों ने एक चीनी दवा निर्माता को बर्ड फ्लू के एक मानवीय टीके के कई परीक्षणों में कारगर पाए जाने के बाद उसके व्यावसायिक उत्पादन को शुरू करने की अनुमति दे दी है । दुनिया भर के वैज्ञानिक बर्ड फ्लू विषाणु के मानव में संक्रमण को रोकने का उपाय खोजने की कोशिश कर रहे हैं ।
साइनोवैक बायोटेक कंपनी के अधिकारियों ने कहा है कि प्रयोगशाला में किये गए दो परीक्षणों में टीके के कारगर होने का पता चला है । इस कंपनी ने चीन के रोग नियंत्रण केंद्र के साथ मिलकर यह टीका विकसित किया है ।
यह घटना वैज्ञानिकों के लिए एक आशाजनक संकेत है, जो वर्षों से इंसानों को बर्ड फ्लू के एच5एन1 विषाणु से बचाने के लिए टीका विकसित करने के लिए मेहनत कर रहे हैं । इस विषाणु से करीब 400 लोग संक्रमित हो चुके हैं और दुनिया भर में कम-से-कम 238 लोग मारे जा चुके हैं । ज्यादातर मौतें एशिया में हुई हैं ।
विशेषज्ञों को चिंता है कि एच5एन1 विषाणु इंसानों में घातक फ्लू की महामारी फैला सकता है । अभी तक ज्यादातर मानव रोगियों को यह विषाणु बीमार पोल्ट्री के सम्पर्क में आने से लगा है, लेकिन एक से दूसरे इंसान के संक्रमित होने के कुछ मामले भी सामने आए हैं ।
श्री मलिक पाइरिस हांगकांग विश्वविद्यालय में माइक्रोबायोलॉजी पढ़ाते हैं । वह उन वैज्ञानिकों में थे, जिन्होंने पहली बार इस विषाणु को पहचाना था, जब यह 11 वर्ष पहले शहर में उभरा था और वह उस टीम में शामिल थे, जिसने बर्ड फ्लू विषाणु और उसकी परिवर्तित किस्मों के आनुवंशिक चित्र उपलब्ध कराए थे ।
श्री पाइरिस ने कहा कि चिंता यह है कि अगर इस विषाणु को इंसानी आबादी के संपर्क में आने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए तो कभी-न-कभी यह विषाणु एक इंसान से दूसरे इंसान में संक्रमण फैलाने की युक्ति सीख सकता है और तब हमारे यहां महामारी फैल जाएगी और उस पर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होगा ।
उन्होंने कहा कि इसके लिए अभी टीके की खोज करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसकी प्रबल संभावना है कि संक्रमण की दर तेजी से बढ़ सकती है । उन्होंने कहा कि एच5एन1 विषाणु का इतिहास सार्स या सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम जैसा लगता है, जो 2002 में चीन में उभरा था और दुनिया भर में फैल गया था । इस रोग से करीब 800 लोगों की मौत हुई थी । हांगकांग में 299 लोग मरे थे ।
श्री पाइरिस ने कहा कि अगर आप सार्स की कहानी पर नजर डालें तो वह भी आज की स्थिति से काफी मिलती-जुलती स्थिति थी । वह भी दक्षिणी चीन के पशुओं और पशु बाजारों में पाया गया विषाणु था और शायद कई साल तक वह लगातार इंसानों को संक्रमित करता रहा । अंततः वह परिवर्तित हो गया और एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने लगा और दुनिया भर में महामारी फैल गई ।
एच5एन1 फ्लू के 2003 में दोबारा उभरने के बाद यह विषाणु दुनिया भर में फैल गया है और इससे लाखों करोड़ों चूजों, बत्तखों और अन्य पक्षियों की मौतें हुई हैं । इंडोनेशिया में बर्ड फ्लू से सबसे ज्यादा, 107 लोगों की मौतें हुईं और वियतनाम में 52 लोग मारे गए ।