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नई दिल्ली में भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन संपन्न

09/04/2008

Indian PM Manmohan Singh, center in blue turban, sits with Tanzanian Foreign Minister Bernard Membe, left, and former President of the African Union Alpha Oumar Konare at the India-Africa Forum in New Delhi, 08 April 2008
Indian PM Manmohan Singh, center in blue turban, sits with Tanzanian Foreign Minister Bernard Membe, left, and former President of the African Union Alpha Oumar Konare at the India-Africa Forum in New Delhi, 08 April 2008
प्रथम भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन आज इस संकल्प के साथ खत्म हुआ कि आर्थिक और विकासात्मक चुनौतियों का सामना करने के लिए वे परस्पर भागीदारी से काम करेंगे । नई दिल्ली से अंजना पसरीचा अपनी रिपोर्ट में कहती हैं कि दोनों पक्षों ने अपने उन विकासशील क्षेत्रों के लिए, जहां व्यापक गरीबी है, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की शपथ ली है ।

नई दिल्ली में दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में अफ्रीकी और भारतीय नेताओं ने कहा कि आज तेल की बढ़ती हुई कीमतें और खाद्य कीमतें सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं ।

तंजानिया के राष्ट्रपति जकाया म्रिशो किकवेते ने कहा कि बढ़ती हुई कीमतें द्रुत विकास और गरीबी में कमी लाने के प्रयासों को मिटा कर रख देंगी ।

उन्होंने कहा, "बड़े पैमाने पर आर्थिक स्थिरता को खतरा है या उसमें व्यवधान पैदा हो गया है और जीवन की स्थितियां और भी ज्यादा कठिन बना दी गई हैं । हम इस बात पर सहमत हैं कि विकासशील देशों में लोगों और अर्थव्यवस्थाओं पर तेल और खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों का प्रभाव खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की जरूरत है ।"

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अफ्रीका को अपने घरेलू उत्पादन के जरिये अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करना चाहिए । उन्होंने टेक्नोलॉजी के जरिये कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए अफ्रीकी देशों की सहायता करने का वायदा किया ।

दो-दिवसीय भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में भारत का संदेश बिल्कुल सीधा और साफ था और वह यह कि जैसे-जैसे अफ्रीका महाद्वीप में अनेक देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण की कोशिश कर रहे हैं, भारत अफ्रीका के साथ भागीदारी करना चाहता है और उसके विकास में सहयोग करना चाहता है ।

अफ्रीकी नेताओं का कहना है कि वे भारत जैसे परिपक्व अर्थव्यवस्था वाले देश से अपने यहां पूंजीनिवेश करने और टेक्नोलॉजी लाने के लिए तैयार हैं । उन्होंने भारत से अपील की है कि वह खुद आकर हमसे बात करे और अपना वादा निभाए । अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष अल्फा उमर कोनारे ने कहा कि इस सम्मेलन में समान आधार पर भागीदारी करने की अफ्रीका की महत्वाकांक्षाओं को समझा गया है । उन्होंने दुभाषिये के जरिये अपनी बात कही ।

उन्होंने कहा कि अब हम ऐसे घोड़े नहीं बने रहना चाहते, जिन पर लोग लगातार बैठे रहें । हर किसी को हमारी पीठ पर से उतरना होगा । हम किसी भी अन्य देश की तरह दौड़ में शामिल होंगे । हम दौड़ने के लिए तैयार हैं और इस दौड़ में हम बराबर के हिस्सेदार हैं ।

सम्मेलन के अंत में जारी की गई दिल्ली घोषणा में भारत और अफ्रीका के बीच भागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया गया है । दोनों पक्षों ने यह भी कहा है कि वे व्यापार वार्ताओं, विश्व संस्थाओं में सुधार और पर्यावरण परिवर्तन जैसे मसलों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा करने के लिए मिल-जुलकर काम करेंगे ।

भारत ने इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था और इसका लक्ष्य संसाधन समृद्ध अफ्रीका में अपना प्रभाव बढ़ाना है । विश्व के कई देश यहां पहले से ही सक्रिय हैं ।

इस बैठक में 14 अफ्रीकी देशों के नेताओं ने भाग लिया, जिनमें युगांडा, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया और तंजानिया जैसे देश भी शामिल हैं ।

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