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Editorials - The following is an Editorial Reflecting the Views of the US Government
खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि का सवाल
23/04/2008

President Bush makes remarks at the 'America's Small Business Summit 2008' in Washington, 18 Apr 2008
President Bush remarks at the 'America's Small Business Summit 2008' in Washington, 18 Apr 2008
हैती से इथियोपिया और फिलिपीन्स तक फैले देशों में खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों की वजह से उथल-पुथल की स्थिति है । इससे यह बात जाहिर होती है कि अनाज, चावल और अन्य बुनियादी चीजों को खरीदने में लाखों लोग किन कठिनाइयों से जूझ रहे हैं । इन जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने यह घोषणा की है कि अमेरिका नए अंतर्राष्ट्रीय खाद्य सहायता के मद में 20 करोड़ डॉलर उपलब्ध करा रहा है । यह कदम विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए राष्ट्र संघ द्वारा 50 करोड़ डॉलर अतिरिक्त धन मुहैया कराने की घोषणा के बाद उठाया गया है ।

जाहिर है कि और धन की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि जिन ताकतों की वजह से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं, उन्हें जल्द दूर करने के आसार नहीं हैं ।

पूरी दुनिया में वस्तुओं के उत्पादन में उछाल ने मांग को बढ़ा दिया है । इससे उनकी कीमतों में भारी उछाल आया है । मिसाल के तौर पर तीन अरब से अधिक लोगों द्वारा मुख्य रूप से उपयोग में लाए जाने वाले चावल की कीमत जनवरी के बाद से अब तक दोगुनी हो गई है । अपने नागरिकों के भोजन को लेकर चिंतित हुए चावल निर्यात करने वाले कुछ देश चावल के निर्यात पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं । ऐसे कदम से कीमतें और बढ़ेंगी । इन निर्यातों पर आश्रित अफ्रीका, दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के लाखों लोग किल्लत से जूझने लगेंगे ।

खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के लिए अमेरिका को दोष दिया जाता है । कहा जाता है कि अमेरिका द्वारा अन्न पर आधारित इथेनॉल के प्रयोग को बढ़ाने से ये कीमतें बढ़ी हैं । अमेरिका आयातित तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल का उत्पादन कर रहा है । हालांकि जैव ईंधन के प्रयोग में वृद्धि से कुछ हद तक कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी हैं । अगर अमेरिका अभी इथेनॉल का उत्पादन बंद भी कर दे तो ये कारण बने       रहेंगे ।

मवेशियों को खिलाने के लिए भी अन्न की जरूरत होती है और आर्थिक वृद्धि के साथ ही मांस व डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ गई है । इस बीच खराब मौसम, खासकर सूखे की वजह से कुछ देशों में कृषि उत्पादन में कमी आ गई है, जबकि वहां अनाजों की मांग बढ़ी है । खेती करने की लागत भी बढ़ी है । चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों में भारी मांग की वजह से फार्म उपकरणों की कीमत बढ़ रही है । स्टील की बढ़ी कीमतों की वजह से इनके दाम पहले से ही बढ़े हुए थे । जमीनों की कीमत भी ऊंची हो गई है । ईंधन की कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ता और किसान, दोनों हलकान हैं । उर्वरक बनाने के काम में आने वाले प्राकृतिक गैस की कीमत भी बड़ी तेजी से बढ़ी है ।

अमेरिका के कृषि मंत्री एड शेफर ने कहा- खाद्य पदार्थों की कीमतों में तीन-चौथाई वृद्धि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ढुलाई की वजह से है । वहीं दूसरी तरफ अन्न उपजाने के बाद किसानों को जो कीमत मिलती है, वह काफी कम होती है ।

इसमें कोई शक नहीं कि राष्ट्र संघ की शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सास्कृतिक शाखा ने यह जानकारी दी है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों के पीछे सबसे बड़ा हाथ ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि का है । इसने कहा कि किसान दुनिया की पोषण की जरूरतों को पूरा कर सके, इसके लिए उन्हें उत्पादन के वैसे नए तरीकों का इजाद करना होगा, जिससे फॉसिल ईंधनों पर उनकी निर्भरता घटे ।

अमेरिका भी इस दिशा में कदम उठा रहा है । अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि आने वाले सप्ताहों में वे दुनिया के सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों के सिर से खाद्य पदार्थ की बढ़ती कीमतों के बोझ को कम करने में मदद के लिए और कदमों की घोषणा कर सकती हैं ।

उन्होंने कहा कि हालांकि अंततः पूरी दुनिया को खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को लंबे समय तक रोकने के लिए एक साथ आना होगा । एक सबसे महत्वपूर्ण कदम यह उठा सकते हैं कि हम दोहा में चल रहे विश्व व्यापार संगठन की वार्ता को सफलतापूर्वक पूरा करें । इससे कृषि उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलेगी और कीमतें कम होंगी ।