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Editorials - The following is an Editorial Reflecting the Views of the US Government
अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक सहयोग
01/05/2008

अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सहायक अमेरिकी विदेश मंत्री डेविड मैककॉर्मिक ने कहा है कि पिछले 15 सालों में भारत विश्व अर्थव्यवस्था में एक मजबूत एवं आत्मविश्वास से भरपूर भागीदार, एक महत्वपूर्ण कारोबारी सहयोगी, वैश्विक सामानों, वस्तुओं एवं सेवाओं के एक बड़े खरीदार व वैश्विक पूंजीनिवेश के लिए एक आकर्षक स्थान के रूप में उभरा है । कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री और अमेरिकन चेम्बर ऑफ कॉमर्स की चेन्नई में हुई बैठक में श्री मैककॉर्मिक ने कहा कि इस महत्वपूर्ण वृद्धि के पूरे दौर में हमने भारत और अमेरिका के बीच के रिश्तों को गहराते भी देखा है ।

पिछले दशक में करीब 7 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर की वजह से भारत वर्ष 2000 से ही प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा है । इस प्रक्रिया में उसने एक विशाल एवं बढ़ते हुए मध्य वर्ग को विकसित किया है । अमेरिका और भारत के बीच का व्यापार बढ़ता ही जा रहा है । वर्ष 2007 में यह कारोबार 5 अरब डॉलर से अधिक का पहुंच गया है । अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है । 

दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्ते भी बहुत मजबूत हैं । भारतीय मूल के करीब 30 लाख अमेरिकी नागरिक और 80 हजार भारतीय छात्र अभी अमेरिका में रह रहे हैं । चेन्नई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास कुशल कामगारों के लिए जितनी संख्या में वीज़ा जारी करता है, उतना दुनिया में कोई दूसरा अमेरिकी दूतावास नहीं करता ।

श्री मैककॉर्मिक ने कहा कि वैश्विक बाजारों में अमेरिका कि उपस्थिति के फैलने के साथ-ही-साथ वैश्विक चुनौतियों से निबटने में उसकी जिम्मेवारी भी बढ़ती जा रही है । इन चुनौतियों में मौसम परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, अप्रसार, वैश्विक व्यापार और पूंजीनिवेश से जुड़े सवाल शामिल हैं ।

यूएस-इंडिया हाई टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन ग्रुप वित्तीय एवं आर्थिक मसलों पर अमेरिका और भारत द्वारा की गई कई पहलों में से एक है । वर्ष 2002 में शुरू इस पहल ने दोनों देशों के बीच उच्च तकनीक के कारोबारो को गति दी है । इससे टेक्नोलॉजी क्षेत्र में पूंजीनिवेश बढ़ा है । यही पूंजीनिवेश भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने में सहायक प्रमुख कारणों में से एक है । वर्ष 2005 में शुरू यूएस-इंडिया सीईओ फोरम का लक्ष्य अमेरिकी एवं भारतीय निजी क्षेत्रों की सलाह एवं अनुभव को भारत-अमेरिका आर्थिक संवाद के साथ जोड़ना है ।

श्री मैककॉर्मिक ने कहा कि बुनियादी बात यह है कि एक साथ मिलकर पिछले कई सालों में हमने बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन अभी और बहुत कुछ करने को है और हमें वह करना चाहिए । उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचों के निवेश, वित्तीय क्षेत्र के उदारीकरण, द्विपक्षीय पूंजीनिवेश, स्वच्छ (प्रदूषण-रहित) तकनीक और बहुपक्षीय कारोबार, ये सभी बातें दोनों देशों के साझे हित हैं । भारत और अमेरिका को इन हितों को पूरा करने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए । उन्होंने कहा कि इन अवसरों का फायदा उठाकर भारत वैश्विक नेतृत्व के उस मुकाम पर पहुंच जाएगा, जहां पहुंचने का उसमें माद्दा है ।