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Cheerleaders dance before start of first Twenty20 cricket match between India and Australia in Mumbai, India, 20 Oct 2007
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भारत में उन विदेशी चियरलीडर्स को लेकर विवाद भड़क उठा है, जिन्हें हाल ही में शुरू किये गए क्रिकेट टूर्नामेंट में मनोरंजन देने के लिए लाया गया है । संकीर्णतावादी भारतीयों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद बहुत सी चियरलीडर्स शरीर को ज्यादा ढकने वाली पोशाकें पहनने लगी हैं ।
दो हफ्ते पहले जब इंडियन प्रीमियर लीग के आयोजकों ने अपने टूर्नामेंट का उद्घाटन किया था तो वे भारतीयों को ऐसा कुछ देने की आशा कर रहे थे, जिसे वे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं – क्रिकेट और नाच-गाने का उत्तेजक मिश्रण । दोनों में परिवर्तन किया गया है ।
अब पारंपरिक क्रिकेट का बहुत तेज और संक्षिप्त संस्करण खेला जा रहा है । मुकाबला नई बनाई गई क्रिकेट टीमों के बीच है, जिनके मालिक बॉलीवुड के बड़े सितारे या बड़े उद्योगपति हैं ।
टीमों के मालिक इन मैचों को चकाचौंध भरे शो में तब्दील करने के लिए विदेशी चियरलीडर्स को लाए थे । एक टीम के मालिक ने अमेरिकन शैली की फुटबॉल टीम के चियरलीडर्स, वॉशिंगटन रेडस्किन्स को बुलाया था । अन्य मालिक पूरे यूरोप से चियरलीडर्स लाए ।
अमेरिकन शैली के शॉर्ट्स और बिकिनी टॉप या मिनी स्कर्ट पहने ये चियरलीडर्स खचाखच भरे स्टेडियम में उस समय डांस करती हैं, जब क्रिकेट के खिलाड़ी बढ़िया शॉट मारते हैं ।
इन नर्तकियों को शहरी भारत के उस वर्ग को आकर्षित करने के लिए लाया गया, जो युवा है और आर्थिक प्रगति के कारण भारी-भरकम वेतन पाता है और दुनिया में जो भी उपलब्ध है, उसका पूरा लुत्फ उठाने के लिए तैयार है ।
परंतु भारत के ज्यादातर लोग संकीर्ण विचारों के हैं । इसलिए जब टेलीविजन पर कम कपड़ों में नृत्य करतीं चियरलीडर्स को भारतीय घरों में दिखाया गया तो इसकी तीखी आलोचनाएं होने लगीं ।
आलोचना करने वालों में महाराष्ट्र में विपक्षी हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी जैसे नेता हैं ।
"चियर गर्ल्स आधी पोशाकों में नाचती हैं, जो भारतीय संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है । जैसे कपड़े वे पहनती हैं, वे निश्चय ही अश्लील हैं, क्योंकि जिस तरह वे अपने शरीर का प्रदर्शन करती हैं, वह सचमुच अश्लीलता है ।"
जब आपत्ति करने वाली आवाजें ऊंची होने लगीं तो टीम मालिकों ने अपनी चियरलीडर्स की पोशाकों में कुछ सुधार करने का फैसला किया । एक टीम ने उनकी छोटी पोशाकों की जगह उन्हें ज्यादा संभ्रांत टखने तक लंबी पेंट पहनाई, एक अन्य ने उन्हें छोटी स्कर्टों के साथ लंबे काले मोजे पहनाए । एक टीम ने चियरलीडर्स को वापस भेजते हुए कहा कि वह ड्रमर बैंड लाने के बारे में सोच रही है ।
परंतु बहुत से दर्शकों को इस सारे विवाद पर आश्चर्य हो रहा है । उनका कहना है कि खेल और चियरलीडर्स का मिश्रण अच्छा मनोरंजन था ।
एक ने कहा, "मेरे विचार में यह अच्छा आइडिया है । यह बेवकूफी है कि हर कोई उनके पीछे पड़ा है । इसमें कोई बड़ी बात नहीं है ।"
दूसरे ने कहा, "मेरे ख्याल से यह ठीक है । सीमा में हर चीज उचित है । मैं चियरलीडर्स के पक्ष में हूं । यह सब बहुत अच्छे मनोविनोद और अच्छी भावना से किया गया है ।"
विवाद खत्म नहीं हुआ है । कुछ लोगों का कहना है कि भारत इन चियरलीडर्स के लिए तैयार नहीं है, जहां आमतौर पर महिलाएं संभ्रांत पोशाकें पहनती हैं । कुछ अन्य का कहना है कि बॉलीवुड की नायिकाओं पर कोई आपत्ति नहीं करता, जो अक्सर बहुत कम कपड़ों में होती हैं और हिंदी फिल्मों में उत्तेजक गानों पर नाचती हैं ।