ब्रिटिश रक्षा मंत्री डेस ब्राउन ने कहा है कि इराकी सैनिकों के साथ काम कर रहे ब्रिटिश सैनिकों को भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं, जिनका संबंध ईरान से हो सकता है । श्री ब्राउन ने ब्रिटिश सांसदों को बताया, "यह संकेत देने के सबूत हैं कि इराक में विद्रोहियों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे उपकरणों और हथियारों का एक बड़ा हिस्सा ईरानी मूल का है या ईरान के रास्ते लाया गया है ।" उन्होंने कहा कि विद्रोही गुटों को ईरान द्वारा समर्थन दिया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता ।
श्री ब्राउन ने ये टिप्पणियां जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष, अमेरिकी नौसेना के एडमिरल माइक मुलेन द्वारा इराक में लड़ाकों को प्रशिक्षण और हथियार देने में ईरान के शामिल होने के बारे में बताने के कुछ दिन बाद की हैं ।
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| Adm. Michael Mullen, chairman of the Joint Chiefs of Staff, conducts a press briefing at the Pentagon, Washington, D.C. |
"मैं विशेषकर इराक में और मध्य-पूर्व में उस सरकार और कुद्स फौज द्वारा घातक और बुरे प्रभाव के बढ़ते जाने को लेकर बेहद चिंतित हूं । मेरा मानना है कि हाल ही की घटनाओं से, खासकर बसरा अभियान से खुलासा हुआ है कि इराक में अस्थिरता भड़काने के लिए ईरान कितना अधिक और कितनी दूर तक जा रहा है ।"
एडमिरल मुलेन ने कहा कि ईरान आपराधिक गिरोहों को हथियार और प्रशिक्षण के रूप में समर्थन दे रहा है और हमले करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे वे गठबंधन और इराकी कर्मचारियों को मार रहे हैं ।
"ईरान सरकार ने कुछ महीने पहले ऐसी गतिविधियां बंद करने का वायदा किया था । यह जाहिर है कि उन्होंने ऐसा नहीं किया है । वास्तव में लगता है कि वे विपरीत दिशा में जा रहे हैं ।"
एडमिरल मुलेन ने कहा कि ईरानी निजाम द्वारा खड़ी की गई इस समस्या से निपटने के लिए अमेरिका सैन्य स्तर पर इराक के भीतर इस खतरे से निपट रहा है । उन्होंने कहा कि हालांकि सभी विकल्प निश्चय ही खुले हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि अभी इसका समाधान राष्ट्रीय शक्ति के अन्य उपाय अपनाने से हो सकता है, जिसमें राजनयिक, आर्थिक और अंतर्राष्ट्रीय दबाव शामिल हैं ।
एडमिरल मुलेन ने कहा कि ईरान सरकार की हानिकारक गतिविधियां इराक तक सीमित नहीं हैं ।
"वे क्षेत्र के अन्य भागों में भी आतंकवादियों को लगातार समर्थन दे रहे हैं, चाहे वे हिज़्बुल्ला हों या हमास, और वास्तव में हम यह सबूत भी देख रहे हैं कि वे अफगानिस्तान में तालिबान की सहायता कर रहे हैं ।"
एडमिरल मुलेन ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई अपेक्षा नहीं है कि अमेरिका ईरान के साथ सैन्य संघर्ष करने जा रहा है । परंतु उन्होंने कहा कि किसी के लिए यह समझना भूल होगी कि अमेरिका में लड़ाई करने की क्षमता नहीं है ।