(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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| Climate change could bring significant threat to food production in many regions of the world |
भारत की राजनीतिक पार्टियों के नेता राष्ट्रपति बुश की टिप्पणी की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने भारत के बढ़ते हुए मध्य वर्ग को पश्चिम में खाद्य कीमतें बढ़ने से संबंधित बताया था । नई दिल्ली से वी.ओ.ए संवाददाता स्टीव हर्मन ने खबर दी है कि भारतीय अमेरिका की ओर उंगली उठा रहे हैं ।
भारत में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष शायद ही कभी किसी मुद्दे पर सहमत होते हैं, लेकिन वे अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना करने के लिए एक हो गए हैं, जिन्होंने कहा था कि भारत के मध्य वर्ग में खाद्यान्न की बढ़ती हुई मांग विश्व में खाद्य पदार्थों के मूल्यों के बढ़ने के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार है ।
भारतीय रक्षा मंत्री ए.के एंटनी ने राष्ट्रपति बुश कि टिप्पणी को एक क्रूर मजाक बताते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार की नीतियां, जिनमें जैव ईंधन की वकालत करना शामिल है, खाद्य कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं ।
सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि राष्ट्रपति बुश विश्व के बम निरीक्षक बनने की अपनी पूर्व भूमिका से हटकर अब विश्व के रोटी निरीक्षक बनना चाह रहे हैं ।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, जो एक प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के कम्युनिस्ट नेता हैं, ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बहक गए हैं । श्री बुश ने यह टिप्पणी शनिवार को अपने भाषण के बाद एक सवाल के जवाब में की थी । उन्होंने अमेरिकी राज्य मिसूरी में अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भाषण दिया था ।
भारत के प्रति अमेरिका की खाद्य नीति की महत्वपूर्ण आलोचक और भौतिकशास्त्री तथा पर्यावरण कार्यकर्ता वंदना शिवा ने कहा कि श्री बुश ने दो कारणों से यह टिप्पणी की ।सुश्री शिवा ने कहा कि इसका एक कारण, इस डर को हवा देना और यह कहना है कि यह समस्या किसी दूसरे की है ताकि अमेरिकी जनता का ध्यान हटाया जा सके । दूसरा कारण, वैश्वीकरण की भ्रांति बनाए रखना है और यह दिखाना है कि वैश्वीकरण से भारत जैसे देशों को फायदा हो रहा है, जबकि ऐसा नहीं है ।
भारतीय विशेषज्ञों ने यहां और अमेरिका से उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि अमेरिका में प्रति व्यक्ति खाद्य उपभोग भारतीयों की तुलना में 3 से 5 गुना है ।
पर्यावरणविद शिवा का कहना है कि कुल मिलाकर भारतीय, यहां बढ़ते हुए मध्य वर्ग के बावजूद ज्यादा नहीं, बल्कि कम खा रहे हैं । उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में यहां प्रति व्यक्ति खाद्य उपभोग 177 किग्रा प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष से गिरकर 152 रह गया है । श्री बुश को 35 करोड़ के मध्य वर्ग का जिक्र करने के बजाय यह बताना चाहिए कि भारतीय बच्चे इससे वंचित हैं । हर वर्ष 10 लाख लोग भोजन की कमी से मर रहे हैं ।
पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी खाद्य और तेल के मूल्य बढ़ने में भारतीयों और चीनियों के बढ़ते हुए प्रभाव की भूमिका बताई थी । कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय और चीनी अपने बढ़ते हुए मध्य वर्गों को मूल्य वृद्धि के वास्तविक प्रभाव से बचाने के लिए ईंधन और भोजन के लिए सब्सिडी देते हैं तथा मूल्यों पर नियंत्रण रखते हैं ।
भारत करीब 80 प्रतिशत ईंधन आयात करता है, जबकि चीन दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक बन गया है । भारत दशकों से खाद्य में आत्मनिर्भर रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उसने फिर से गेहूं का आयात करना शुरू कर दिया है । चीन के सामने दुनिया की केवल 7 प्रतिशत खेती योग्य भूमि पर विश्व की 20 प्रतिशत आबादी को भोजन मुहैया कराने का पारंपरिक चुनौती है ।
भारतीय उद्योग परिसंघ, जिसमें 7,000 औद्योगिक समूह शामिल हैं, खाद्य पदार्थों के बढ़ते हुए मूल्यों के लिए जैव ईंधन के लिए फसलें उगाने, सूखे में वृद्धि होने और किसानों को सब्सिडी देने को जिम्मेदार मानते हैं, जिससे उन्हें विश्व में मूल्य वृद्धि बरकरार रखने के लिए खेतों को खाली छोड़ने का प्रोत्साहन मिलता है । रविवार को सीआईआई ने ऐलान किया कि वह भारत में खाद्य के बढ़ते हुए मूल्यों की जांच करने के लिए एक कार्यदल का गठन कर रहा है ।