(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
चीन सरकार शेनझेन शहर में दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के बाद वार्ता के दूसरे दौर के लिए सहमत हो गई है । बातचीत के बावजूद चीन लगातार तिब्बती धार्मिक नेता की आलोचना कर रहा है ।
चीन में सरकारी समाचार मीडिया ने कहा है कि बीजिंग और तिब्बत के धार्मिक नेता के प्रतिनिधियों के बीच फिर से वार्ता होगी, लेकिन यह नहीं बताया है कि वार्ता कहां या कब होगी । रविवार को दक्षिणी चीनी शहर शेनझेन में दोनों पक्षों की बैठक हुई थी ।
बैठक से पहले, उसके दौरान और बाद में सरकारी मीडिया ने लगातार ऐसी खबरें दीं, जिनमें दलाई लामा पर तिब्बत को चीन से अलग करने और हिंसक दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया था ।
सोमवार को सरकारी टेलीविजन ने बीजिंग द्वारा नियुक्त पंचेन लामा, ग्याल्तसेन नोर्बू को तिब्बत के इतिहास पर सरकारी प्रदर्शनी में भाग लेते और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की प्रशंसा करते हुए दिखाया । उन्होंने कहा कि वह ओलंपिक खेलों के सफल होने की प्रार्थना करते हैं । उन्होंने कहा कि महान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में तिब्बत निश्चय ही ज्यादा समृद्ध होगा और तिब्बती लोगों का जीवन बेहतर और खुशहाल होगा ।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने ग्याल्तसेन नोर्बू को तिब्बत का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध नेता नियुक्त किया था, लेकिन बहुत से तिब्बती उनकी सत्ता को स्वीकार नहीं करते और वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आते हैं ।
दलाई लामा ने 1995 में गेंदुन चोकयी नाइमा नाम के एक छह-वर्षीय लड़के को पंचेन लामा चुना था, लेकिन चीनी अधिकारियों ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और उसके बाद से वह कभी दिखाई नहीं दिया है ।
मानवाधिकार संगठनों ने उसे विश्व का सबसे छोटा राजनीतिक कैदी बताया है । चीनी अधिकारियों का कहना है कि वह सामान्य जीवन बिता रहा है और नहीं चाहता कि उसे परेशान किया जाए ।
तिब्बत सदियों तक चीन के प्रभाव में रहा है, लेकिन 1950 के दशक में चीनी सैनिकों द्वारा हमला किये जाने से पूर्व वह अधिकतर स्वतंत्र रहा था । दलाई लामा 1959 में चीनी शासन के खिलाफ आंदोलन असफल होने के बाद तिब्बत से भाग आए थे ।
चीन का कहना है कि तिब्बत ऐतिहासिक रूप से उसका हिस्सा है और दलाई लामा, जो भारत में निर्वासित सरकार चलाते हैं, देश को तोड़ना चाहते हैं । दलाई लामा का कहना है कि वह तिब्बत के लिए आजादी नहीं, बल्कि अधिक स्वायत्तता चाहते हैं ।
दलाई लामा के दूत और चीनी अधिकारी वर्ष 2000 से छह बार वार्ता कर चुके हैं, लेकिन उनके संबंधों में कोई सुधार नहीं हुआ है ।
हाल ही में हुए आंदोलन के बाद पश्चिमी नेताओं ने चीन पर वार्ता करने का दबाव डाला था, जिसके बाद चीन वार्ता का यह नवीनतम दौर आयोजित करने के लिए मान गया था ।
बीजिंग का कहना है कि दलाई लामा ने मार्च में सरकार-विरोधी प्रदर्शन कराए थे, जो हिंसक हो गए थे और कम-से-कम 23 लोग मारे गए थे । नोबेल शांति पुरस्कार विजेता इस आरोप से इन्कार करते हैं और निर्वासित गुटों का कहना है कि हिंसा में बहुत से तिब्बती मारे गए थे, लेकिन इनमें से किसी भी संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती ।
चीन की हिंसक प्रतिक्रिया के कारण ओलंपिक मशाल की वैश्विक रिले के दौरान अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हुए थे और बीजिंग ओलंपिक खेलों का बहिष्कार करने की मांग भी की गई है ।