भारत-अमेरिकी परमाणु समझौते पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामपंथी दलों की समिति की बैठक 28 मई को फिर से होगी, क्योंकि सरकार अपने वामपंथी सहयोगियों को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ भारत के लिए विशेष सुरक्षा उपायों के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मनाने में असफल रही ।
विदेश मंत्री और इस मुद्दे पर वाम दलों के साथ वार्ता करने के लिए प्रमुख सरकारी प्रतिनिधि प्रणब मुखर्जी ने बैठक के इस आठवें दौर के बाद केवल इतना कहा कि आईएईए के साथ सुरक्षा उपायों के समझौते पर गहरी चर्चा की गई । उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी की मौजूदगी में कहा कि समिति की 28 मई को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर आगे चर्चा की जाएगी ।
इस बैठक में भाग लेने वाले फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता देवव्रत विश्वास ने कहा कि सरकार चाहती है कि समिति आईएईए के साथ समझौते को मंजूरी दे दे, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ और स्पष्टीकरण मांगे हैं । इसलिए समिति ने 28 मई को फिर से बैठक करने का फैसला किया ।
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| Shyam Saran |
उधर परमाणु मुद्दे पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन ने आज नई दिल्ली में कहा कि अगर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिकी परमाणु समझौता संपन्न नहीं हुआ तो वॉशिंगटन में सरकार बदलने पर इस समझौते से संबंधित राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ जाएगी ।
उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों ने इस समझौते के तहत भारत के दायित्वों और अमेरिका की जिम्मेदारियों के बारे में कुछ उचित सवाल उठाए हैं और सरकार उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है तथा इस समझौते को आगे बढ़ाने के फायदों पर जोर दे रही है ।
पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा कि सरकार इस समझौते के लिए प्रतिबद्ध है और इसे सम्पन्न करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा । उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर इतना आगे तक जाकर इसे अधूरा छोड़ना उचित नहीं है और यह परमाणु समझौता भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त उपक्रम है, इसलिए इसे वास्तविकता में बदलने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा ।