(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
आतंकवाद-विरोधी उच्च अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका को अल-कायदा के आतंकवादियों से लड़ने में मिश्रित सफलता मिली है । राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के राष्ट्रपति बुश द्वारा नियुक्त अधिकारी माइकेल लाइटर ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों के सुरक्षित गढ़ों को खत्म करने के लिए ज्यादा कदम उठा सकता है । श्री माइकेल लाइटर ने, जो पिछले साल नवंबर से राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के कार्यकारी निदेशक हैं और जिनकी सीनेट द्वारा पुष्टि किये जाने की उम्मीद है, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कई सफलताएं गिनाईं, जिनमें साजिशों का पता लगाना और उन्हें नाकाम करना शामिल है । परंतु उन्होंने कहा कि अल-कायदा के आतंकवादियों को दूर रखने के लिए, खासकर अफगानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तानी कबीलाई क्षेत्रों में ज्यादा काम किये जाने की जरूरत है ।
उन्होंने कहा कि हम अल-कायदा की साजिशों को रोकने में सफल नहीं हुए हैं । हम इसमें बाधा डाल सकते हैं, लेकिन हम उस वरिष्ठ नेतृत्व को खत्म नहीं कर सके, जो संघ-शासित कबीलाई क्षेत्रों में मौजूद है और हम इस संगठन को वह संदेश देने से भी नहीं रोक सके, जिससे उन्हें और अधिक भर्तियां करने में सफलता मिली है ।
श्री लाइटर ने कहा कि अमेरिका सुरक्षित ठिकानों की समस्या पर पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसकी सफलता पाकिस्तान सरकार पर निर्भर है । परंतु कुछ डेमोक्रेट सदस्यों को संदेह है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को हल कर सकता है या ऐसा करने के लिए तैयार है । इस कारण ओरेगॉन के डेमोक्रेट सीनेटर रॉन वाइडन और श्री लाइटर के बीच निम्न बातचीत हुई ।
श्री वाइडन ने कहा कि क्या आप समझते हैं कि पाकिस्तानी सरकार उस क्षेत्र में अल-कायदा के सुरक्षित गढ़ों को जल्दी ही खत्म करने में सक्षम होगी । श्री लाइटर ने कहा कि मेरे विचार में पाकिस्तान की सरकार बहुत कुछ कर सकती है ।
कांग्रेस के डेमोक्रेट सदस्य उस अमेरिकी सहायता कार्यक्रम की आलोचना भी कर रहे हैं, जिसके जरिये पाकिस्तान की सेना को अफगानिस्तान की सीमा से लगे अपने क्षेत्रों में आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाने के लिए वर्ष 2001 से करीब 6 अरब डॉलर दिये गए हैं ।
मंगलवार को सरकार के जवाबदेही कार्यालय ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिकी सहायता कार्यक्रम के बावजूद अपनी सीमाओं के भीतर आतंकवादियों को हराने में नाकाम रहा है । कार्यालय का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को विद्रोह को निशाना बनाने के लिए तैयार नहीं किया गया है और उनके पास उपकरणों तथा प्रशिक्षण का अभाव है । इस मुद्दे पर बुधवार को सदन की विदेशी मामलों की समिति की बैठक हो सकती है ।