(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
 |
| Cyclone-affected people wait for relief goods in a village in the Irrawaddy Delta region, 06 May 2008 |
अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियां बर्मा के उन लाखों लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो शनिवार को आए विनाशकारी समुद्री तूफान के बाद भोजन और पानी से वंचित हैं । सरकार ने कहा है कि इस आपदा में करीब 22,500 लोग मर गए हैं और 41,000 लापता हैं ।
सरकारी हेलीकॉप्टरों ने बर्मा के सबसे ज्यादा प्रभावित इरावाडी डेल्टा क्षेत्र के गांवों में, जहां समुद्री तूफान के साथ आए ज्वार ने समूचे नगर तबाह कर दिये, भोजन और पानी गिराया है । सरकारी मीडिया का कहना है कि सबसे ज्यादा मौतें इसी क्षेत्र में हुई हैं । जो लोग जीवित बच गए हैं, वे कई दिनों से मदद का इंतजार कर रहे हैं ।
बैंकॉक में अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठन, वर्ल्ड विजन के प्रवक्ता जेम्स ईस्ट ने कहा है कि सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना लगभग असंभव रहा है । "इस क्षेत्र में एक सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस समुद्री तूफान से बाढ़ आ गई है और सड़कें पानी में डूबी हुई हैं । पेड़ नीचे गिर गए हैं, पुल टूट गए हैं । स्टाफ का कहना है कि इन सुदूर क्षेत्रों में पहुंचने के लिए या तो पैदल चलना पड़ता है, इन नदियों को नाव द्वारा पार करना पड़ता है या तैरना पड़ता है ।"
कुछ सहायता कार्यकर्ता किसी तरह पहुंचने में सफल हो गए हैं । वे जो खबरें भेज रहे हैं, उनसे इस संकट की भयावहता धीरे-धीरे पता चल रही है । विश्व खाद्य कार्यक्रम के पॉल रिस्ले का कहना है कि समाचार लगातार दुखद होते जा रहे हैं ।
"डेल्टा क्षेत्र से हमारी आकलन टीमों द्वारा भेजी गई प्रारंभिक खबरें विचलित करने वाली हैं । ऐसा लगता है कि लाखों लोगों के घर इस समुद्री तूफान में पूरी तरह तबाह हो गए हैं ।"
 |
| An aerial view of devastation caused by the cyclone Nargis on Saturday, is seen at an unknown location in Myanmar, Tuesday, May 6, 2008.AP |
पीड़ितों को सहायता पहुंचाने में विलंब हो रहा है और इसका कारण सैन्य सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहायता को स्वीकार करने में हिचकिचाना है । बांग्लादेश से एक मालवाहक विमान के पहुंचने से कुछ घंटे पहले, जिसमें पीड़ितों के लिए उच्च शक्ति से भरपूर बिस्किट थे, विश्व खाद्य कार्यक्रम को भोजन उतारने और बांटने की अनुमति नहीं मिली थी ।
बीसियों सहायता कार्यकर्ता, जिनकी भोजन बांटने के लिए बहुत जरूरत है, बैंकॉक में बर्मी अधिकारियों द्वारा उन्हें वीज़ा दिये जाने का इंतजार कर रहे हैं । श्री रिस्ले ने बताया कि इस दौरान रंगून में, जिसे यांगोन भी कहा जाता है, काम कर रहे कर्मचारियों पर बहुत बोझ पड़ रहा है । "जब से संकट शुरू हुआ है, यांगोन स्थित हमारा पूरा स्टाफ लगातार 15 घंटे तक रोज काम कर रहा है और फिर उन घरों और परिवारों में जा रहा है, जिनके पास बिजली नहीं है, पीने का पानी नहीं है और फोन नहीं हैं । इसलिए यह काम बहुत कठिन है । हमें अतिरिक्त लोगों की जरूरत है ।"
सहायता एजेंसियों ने कहा है कि सैन्य सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके प्रतिनिधियों को वीज़ा मिल जाएंगे । बर्मी सरकारी अधिकारियों ने कहा कि वे मानवीय सहायता का स्वागत करते हैं, जो इस एकाकी नेतृत्व का अभूतपूर्व कदम है, क्योंकि अतीत में वह विदेशी सहायता को अपने शासन के लिए खतरे की तरह देखता रहा है । बर्मा में 1962 से सेना का शासन है ।
पश्चिमी सरकारें बर्मा की सैन्य सरकार से आपदा आकलन टीमों को आने की इजाजत देने का अनुरोध कर रही हैं । अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि अमेरिका 30 लाख डॉलर से ज्यादा की सहायता देने के लिए तैयार है और अमेरिकी नौसेना वहां आकर मृतकों और लापता लोगों की तलाश करने में मदद कर सकती हैं । अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कम-से-कम 3 नौसैनिक जहाज बुलाए जाने के इंतजार में थाईलैंड के समुद्री तट पर खड़े हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस फेडरेशन और रेड क्रीसेंट सोसायटी बर्मा में समुद्री तूफान से प्रभावित लोगों की मदद के लिए करीब 60 लाख डॉलर देने की अपील कर रही हैं । रेड क्रॉस ने कहा है कि यह प्रारंभिक अपील आपात्कालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए है और संकट की पूरी जानकारी होने के बाद इससे अधिक धन की अपील की जाएगी ।
इंटरनेशनल रेड क्रॉस ने इसे बहुत बड़ा संकट बताया है । उसने कहा है कि समुद्री तूफान नर्गिस द्वारा किये गए विनाश की पूरी जानकारी का अभी पता लगाया जाना है, लेकिन जो जानकारी है, वह बहुत परेशान करने वाली है ।
बर्मी अधिकारियों ने बताया है कि 22,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 40,000 से ज्यादा लापता हैं । इन आंकड़ों के अनुसार, नर्गिस 1991 के बाद विश्व का सबसे घातक तूफान है ।
रेड क्रॉस ने जानकारी दी है कि इरावाडी नदी डेल्टा क्षेत्र के गांवों में 95 प्रतिशत मकान तबाह हो गए हैं । उसने कहा है कि 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं । सहायता कार्यकर्ताओं ने बताया है कि सड़कें रुकी हुई हैं, इसलिए बहुत से तबाह क्षेत्रों में पहुंचना असंभव हो गया है । उनका कहना है कि संचार, बिजली की लाइनें और पानी तथा सफाई की प्रणालियां ठप हो गई हैं ।
रेड क्रॉस के प्रवक्ता मैथ्यू कोकरान ने वी.ओ.ए को बताया कि तूफान में जीवित बचे लोगों को हर चीज की जरूरत है । उन्हें रहने के लिए आपात्कालीन स्थान चाहिए । उन्हें भोजन चाहिए । उनका कहना है कि ठहरे हुए पानी में मलेरिया का मच्छर पनपता है, इसलिए कीटनाशकों से युक्त मसहरियों की जरूरत है । उन्होंने चेतावनी दी है कि महामारी फैलने का बहुत बड़ा खतरा है । "हम जितनी जल्दी संभव हो, पानी साफ करने की गोलियां हासिल करना चाहते हैं और इन प्रभावित समुदायों को पीने का पानी मुहैया कराना चाहते हैं । ऐसी स्थिति में हमेशा यह खतरा रहता है कि अगर समुदायों को बहुत जल्दी साफ पानी नहीं पहुंचाया गया तो गंदे पानी से होने वाली बीमारियों के फैलने का दूसरा गंभीर संकट पैदा हो सकता है ।"
प्रदूषित जल से हैजा और पेचिश हो सकती है, जिसके कारण पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की सबसे अधिक मौतें होती हैं ।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्री तूफान आने से 48 घंटे पहले उनकी सही भविष्यवाणी की जा सकती है । बर्मा सरकार की इसलिए आलोचना की जा रही है, क्योंकि उसने अपनी जनता को संभावित तूफान के बारे में पहले से सावधान नहीं किया ताकि वे अपनी जान बचाने के लिए कदम उठा सकते ।
श्री मैथ्यू कोकरान का कहना है कि वह इन खबरों पर कुछ नहीं कह सकते, लेकिन वह मानते हैं कि पहले से चेतावनी देना बहुत महत्वपूर्ण है । "इस आपदा से पहले हम म्यांमार (बर्मी) रेड क्रॉस के साथ भंडारों का पहले से इंतजाम कर रहे थे, जैसा कि हम मानसून का मौसम और तूफान का मौसम आने से पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के बहुत से देशों में करते हैं । हम उन क्षेत्रों में भंडारण करते हैं, जहां बाढ़ और तूफान आने का खतरा रहता है । पर मेरे विचार में यह बिल्कुल सही है कि किसी आपदा के आने से पहले ही उसकी तैयारी करना ज्यादा कारगर होता है न कि इसके आने के बाद, जब बहुत सारी जानें चली जाती हैं और बहुत सारे लोग विस्थापित हो जाते हैं ।"
श्री कोकरान ने कहा कि फेडरेशन के क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन समन्वयक बर्मा पहुंच गए हैं और इससे मानवीय अभियान और अधिक प्रभावशाली होगा । उन्होंने कहा कि बुधवार को कुआलालंपुर से आपात्कालीन तम्बुओं का विमान बर्मा पहुंच गया है ।