(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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| दमित्री मेदवेदेव |
नवनियुक्त क्रेमलिन नेता दमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि रूस को कानून के लिए सच्चा सम्मान विकसित करना चाहिए । परंतु वी.ओ.ए के मॉस्को संवाददाता पीटर फेदिन्स्की ने खबर दी है कि नए राष्ट्रपति के आलोचक उनके सत्ता में आने को उन कानूनी मूल्यों के विपरीत मानते हैं, जिन्हें बढ़ावा देने का वायदा वह कर रहे हैं ।
क्रेमलिन में एक भव्य समारोह में बड़ी धूम-धाम से श्री दमित्री मेदवेदेव ने सत्ता संभाली । इसमें सैन्य टुकड़ियों ने प्रदर्शन किया और 2,000 मेहमानों ने भाग लिया, जिनमें राजनीतिक और सैन्य नेता, ऑर्थोडॉक्स, यहूदी और मुस्लिम धार्मिक नेता तथा विदेशी राजदूत शामिल थे ।
श्री मेदवेदेव एक मर्सिडीज बेन्ज़ लिमोजीन में क्रेमलिन आए । वह लाल गलीचे से सजी लंबी सीढ़ियां चढ़कर एक भव्य हॉल में उस मंच तक गए, जहां उनका इंतजार सेवानिवृत्त होने वाले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस की संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष और सदन के दोनों सदनों के नेता कर रहे थे ।
रूसी संविधान की एक प्रति पर अपना हाथ रख कर क्रेमलिन के नए नेता ने इस दस्तावेज का पालन करने, रूसी सार्वभौमिकता और नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करने का वायदा किया ।
6 मिनट के अपने भाषण में श्री मेदवेदेव ने अपने सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों, नागरिक और आर्थिक स्वतंत्रता के विकास में कानून के महत्व पर बल दिया । राष्ट्रपति ने कहा कि रूसियों का फर्ज है कि वे कानून का सच्चा सम्मान करें और कानूनी संदेहवाद से ऊपर उठें, जिससे आधुनिक विकास में बाधा पड़ती है । उन्होंने कहा कि एक सुविकसित कानून प्रणाली आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए वातावरण तैयार करती है, उद्यमशीलता की सहायता करती है और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करती है । श्री मेदवेदेव ने कहा कि रूस की वैश्विक भूमिका और अन्य देशों के साथ संवाद करने के लिए भी कानून का महत्व कम नहीं है । इस समारोह का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया । फिर भी आलोचकों का कहना है कि क्रेमलिन का नियंत्रण न केवल टेलीविजन पर है, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया पर है, जिससे राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान श्री मेदवेदेव को अनुचित लाभ मिला ।
इस समारोह की पूर्व संध्या को मॉस्को के अधिकारियों ने दंगा पुलिस के सैकड़ों जवानों की मदद से उन प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया, जो राष्ट्रपति चुनावों को धोखाधड़ी से भरपूर समझने के कारण उसका विरोध कर रहे थे । प्रदर्शनकारियों में से एक, यूनाइटेड सिविल फ्रंट के अलेक्जेंडर खातोव ने पूछा कि क्या नए रूसी नेता को अपनी जनता का सच्चा समर्थन हासिल है ।
श्री खातोव ने कहा कि 40 प्रतिशत रूसियों ने चुनावों में भाग नहीं लिया और अन्य 24 प्रतिशत ने श्री मेदवेदेव के खिलाफ वोट दिया । कार्यकर्ता ने कहा कि इस तरह कुल 64 प्रतिशत ने इस राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं दिया । परंतु श्री खातोव के आकलन से श्री मेदवेदेव का एक समर्थक भड़क उठा और चिल्लाने लगा कि हर देश में ऐसे लोग होते हैं, जो मतदान करने की परवाह नहीं करते ।
राष्ट्रपति पद छोड़ने से कुछ मिनट पहले एक संक्षिप्त भाषण में श्री व्लादिमीर पुतिन ने रूस की जनता को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और श्री मेदवेदेव की सफलता की कामना की ।
श्री पुतिन ने 8 वर्ष पहले अपने शपथ ग्रहण समारोह को याद किया, जब उन्होंने स्पष्टता से और ईमानदारी से काम करने तथा रूसी राज्य और उसकी जनता की पूरी निष्ठा से सेवा करने का वायदा किया था । उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी शपथ का उल्लंघन नहीं किया ।
आलोचकों का कहना है कि श्री मेदवेदेव का राष्ट्रपति बनना और प्रधानमंत्री के तौर पर श्री पुतिन की नई भूमिका सत्ता का स्पष्ट हस्तांतरण नहीं है । कुछ आलोचकों ने यह भी कहा है कि प्रथम रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने अपने उत्तराधिकारी को राष्ट्रपतीय उत्तराधिकार के प्रतीक के तौर पर एक पेन भेंट किया था । श्री येल्तसीन ने इस पेन का इस्तेमाल विधेयकों पर हस्ताक्षर करके उन्हें कानून बनाने के लिए किया था । श्री पुतिन ने कहा है कि वह इस उपहार को अपने उत्तराधिकारी को देने के बजाय अपने पास रखेंगे ।