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नेपाल को आर्थिक पुनरुत्थान के लिए निवेशकों, दानदाताओं से आशा

07/05/2008

(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)

A Nepalese woman sweeps the floor of her home in a slum located along the polluted Bagmati river in Kathmandu, 09 Apr 2008
A Nepalese woman sweeps the floor of her home in a slum located along the polluted Bagmati river in Kathmandu, 09 Apr 2008
नेपाल को आशा है कि निवेशकों और दानदाताओं के लौटने से उस अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, जो वर्षों की राजनीतिक अनिश्चितता के कारण ठहरी हुई थी । यह आशा की जा रही है कि हाल ही में हुए चुनावों से देश को अपने पड़ोसी भारत और चीन की उच्च आर्थिक वृद्धि से लाभ होगा ।

 

पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल रही है, क्योंकि राजनीतिक अनिश्चितता के कारण बुनियादी ढांचे पर खर्च में विलंब हुआ और विदेशी निवेशक नेपाल से दूर रहे । यहां लगभग रोज बिजली की कमी रहती है और ईंधन खरीदने के लिए लंबी कतारें लगती हैं ।

 

नया संविधान बनाने के लिए हुए असेंबली के चुनावों के एक महीने बाद अब नेपाल अपनी अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे रहा है ।

 

नेपाली टाइम्स के सम्पादक कुंद दीक्षित ने कहा कि वर्षों तक चले कम्युनिस्ट विद्रोह और अस्थिरता के कारण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा । "राजनीतिक अस्थिरता की वजह से कोई भी सत्ता में इतने लंबे समय तक नहीं रहा कि ऊर्जा, बिजली, पानी की आर्थिक योजनाओं को लागू कर पाता । पूंजीनिवेश लगभग शून्य है और कोई बड़ी निर्माण या पनबिजली योजना शुरू नहीं की गई है ।"

 

राष्ट्र संघ की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, चारों ओर देशों से घिरे इस देश में 2007 में केवल 2.5 प्रतिशत वृद्धि हुई । यहां की अर्थव्यवस्था विदेश में काम कर रहे नेपालियों द्वारा हर वर्ष भेजे जाने वाले 1.5 अरब डॉलर पर निर्भर है । राष्ट्र संघ का अनुमान है कि इस साल वृद्धि 4 प्रतिशत तक हो सकती है ।

 

नेपाल के योजना आयोग के उपाध्यक्ष जगदीश चंद्र पोखरेल का कहना है कि चुनाव समाप्त हो चुके हैं और यह समय निवेशकों और दानदाताओं के वापस आने का है । उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान की कई योजनाएं हैं और ज्यादा लोगों को नौकरियां दी जाएंगी । "तात्कालिक प्राथमिकताएं रोजगार पैदा करने की हैं और यह देखना होगा कि इसे कैसे किया जा सकता है । हमने अनुमान लगाया है कि ढांचागत परियोजनाओं में अधिक निवेश करना होगा, जिससे तुरंत रोजगार पैदा होगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी ।"

 

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार स्थिर रही तो वह ढांचागत निवेश बढ़ा सकती है और पर्यटन को भी बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि विद्रोह खत्म हो चुका है । इससे ठोस आर्थिक विकास होगा, जिससे नेपाल को वर्षों की अनिश्चितता के बाद गरीबी कम करने में मदद मिलेगी ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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