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| Chinese climbers cheer with the Olympic torch and flags at the top of the Mount Everest, reaching the 8,850-meter peak of the world's tallest mountain. |
चीनी धावक ओलंपिक मशाल विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत हिमालय की चोटी तक ले गए हैं । यह घटना बीजिंग खेलों की मशाल रिले में सबसे महत्वपूर्ण है, जिसके दौरान विश्व भर में कई स्थानों पर प्रदर्शन किये गए थे ।
हिमालय पर्वत के शिखर से मशाल ले जाने वाले धावक चिल्लाए कि हमने यह कर दिखाया है । स्थानीय तिब्बती नोर्बू झामदू ने एक विशेष लाइटर से मशाल जलाई ।
"हमने यह मशाल विश्व के शिखर पर जलाई है ।"
समूचे चीन के लोगों ने हिमालय पर मशाल जलाने का सीधा प्रसारण देखा । चीनी अधिकारियों ने ओलंपिक मशाल रिले को हिमालय पर ले जाने के चरण को इस यात्रा को सबसे महत्वपूर्ण चरण कहा है ।
हिमालय चीन और नेपाल की सीमा पर स्थित है । करीब 8,000 मीटर की ऊंचाई पर तेज हवाएं चलती हैं, बर्फ जमा देने वाला तापमान होता है और इतनी ऊंचाई के कारण ऑक्सीजन की कमी रहती है ।
चीनी प्रौद्योगिकी मंत्री बान गांग ने पत्रकारों को बताया कि रॉकेट वैज्ञानिकों समेत बहुत से विशेषज्ञ इन समस्याओं से निपटने के लिए काम करते रहे हैं ।
उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के शोध के बाद वह मशाल ले जाने वालों को पर्वत पर चढ़ते हुए और मशाल जलाते हुए देख कर बहुत खुश हैं ।
उन्होंने एक और तकनीकी उन्नति की ओर ईशारा किया- शिखर पर टेलीविजन कैमरों से सीधा प्रसारण करना ।
अधिकारियों ने मुख्य मशाल रिले को दक्षिणी शहर शेनझेन में रोक दिया था, जब शिखर पर जाने का अंतिम प्रयास जारी था । हिमालय पर जलाई गई मशाल को बाद में रिले के दौरान मुख्य मशाल के साथ जोड़ दिया जाएगा ।
चीन पहुंचने से पहले कई देशों में मशाल रिले के दौरान चीन-विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जो अक्सर अराजक हो गए थे । इसके कारण चीन-समर्थक प्रदर्शनकारी भी अंतर्राष्ट्रीय मशाल मार्ग पर पूरी ताकत के साथ निकल आए थे ।