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विशेषज्ञों ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान के बारे में अमेरिकी नीति पर चिंता जताई

08/05/2008

Richard Holbrooke (undated photo)
Richard Holbrooke .
कांग्रेस के आयोग के समक्ष उपस्थित हुए विशेषज्ञों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रति अमेरिकी नीतियों के बारे में चिंताएं व्यक्त की हैं । वी.ओ.ए के डान रॉबिन्सन ने कैपिटॉल हिल से प्रतिनिधि सभा की विदेशी मामलों की समिति के समक्ष विदेश मंत्रालय और सेना के भूतपूर्व अधिकारियों की गवाही के बारे में खबर दी है ।

 

यह सुनवाई उस समय हो रही है, जब सांसद अमेरिकी सरकार के जवाबदेही कार्यालय (गवर्नमेंट एकाउंटेबिलीटी ऑफिस) द्वारा पाकिस्तान को अमेरिका पर 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकवादी हमलों के बाद से अल-कायदा और तालिबान फौजों से लड़ने में मदद करने के लिए दिये गए 5 अरब डॉलर से ज्यादा के प्रभाव के बारे में दी गई जानकारियों पर विचार कर रहे हैं ।

 

5.5 अरब डॉलर पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा 2002 के बाद दिये गए 10 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि का हिस्सा हैं ।

 

जल्दी ही जारी की जाने वाली पूर्ण रिपोर्ट की पूर्व समीक्षा के कुछ मुख्य बिंदु ये हैं- अमेरिकी गठबंधन सहायता कोष पर निगरानी का अभाव, अफगानिस्तान की सीमा से लगे संघ-शासित कबीलाई क्षेत्रों में आतंकवादी फौजों को हराने के पाकिस्तानी सेना के असफल प्रयास और विद्रोह का मुकाबला करने की योग्यताओं, हथियारों और प्रशिक्षण की कमी ।

 

सदन की विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष कैलीफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद हॉवर्ड बर्मन हैं ।

 

"अमेरिकी सरकार से पाकिस्तान को हवाई रक्षा राडार के रख-रखाव के लिए पैसा देने के लिए क्यों कहा जा रहा है ? अल-कायदा के पास वायु सेना होने की जानकारी नहीं है और इन कोषों का उद्देश्य चरमपंथियों के खिलाफ लड़ाई में सहायता देना है, न कि पाकिस्तान की पारंपरिक युद्ध क्षमता को बढ़ाना । इससे न केवल यह सवाल खड़ा होता है कि इस प्रशासन ने टैक्स की इस राशि की क्या कीमत आंकी है, बल्कि हमें सुरक्षित रखने के लिए वे जो कर रहे हैं, वह कितना कारगर है ।"

 

राष्ट्र संघ में पूर्व अमेरिकी राजदूतों, रिचर्ड होलब्रूक और थॉमस पिकरिंग ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता के मुद्दे पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी नीति के व्यापक प्रश्नों पर भी ध्यान केंद्रित किया ।

 

श्री होलब्रूक ने पाकिस्तान के कबीलाई क्षेत्रों के लिए अमेरिकी सहायता योजनाओं की आलोचना करते हुए 75 करोड़ डॉलर की पंचवर्षीय योजना को दयनीय बताया और जवाबदेही कार्यालय के एक निष्कर्ष का उल्लेख किया ।

 

"यह बिल्कुल सही है, जैसा कि जवाबदेही कार्यालय ने कहा है कि अमेरिका के लिए कोई रणनीति नहीं है । इससे भी बदतर यह है कि पाकिस्तान सरकार, जो सैन्य शासन के एक दशक बाद पाकिस्तान में लोकतंत्र के इस नए युग में अपनी अंदरूनी घरेलू समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, उसे भी यह स्पष्ट पता नहीं है कि वह क्या कर रही है ।"

 

श्री होलब्रूक और श्री पिकरिंग, दोनों ने अफगानिस्तान के कमजोर होने पर जोर दिया और कहा कि यह अमेरिका और नाटो की समूची रणनीति का कारगर न होना है ।

 

श्री पिकरिंग ने कहा कि पाकिस्तानी राजनीतिक घटनाओं की पृष्ठभूमि में कबीलाई क्षेत्रों पर पाकिस्तान की संघीय सरकार का नियंत्रण आसान नहीं होगा ।

 

"अब वहां एक चुनावी प्रक्रिया है, लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप जो पार्टियां आगे आई हैं, जो पार्टियां ऐतिहासिक रूप से परस्पर सहयोगी नहीं रही हैं और मेरे विचार में जिनका प्रशासन में या सरकार की ईमानदारी में भी बहुत उल्लेखनीय रिकॉर्ड नहीं रहा है, नए परिदृश्य में किसी-न-किसी तरह उनसे निपटना होगा, उन्हें आगे बढ़ाना होगा, उन्हें संघ-शासित कबीलाई क्षेत्रों में प्रगति करने का प्रयास करने की जिम्मेदारी उठानी होगी ।"

 

श्री पिकरिंग ने कहा कि अफगानिस्तान में असफलता का अर्थ तालिबान और अल-कायदा के पाकिस्तानी सुरक्षित गढ़ों से नए खतरे होगा ।

 

अफगानिस्तान के बारे में उनकी निराशा से श्री होलब्रूक और मेजर जनरल जेम्स जोन्स सहमत हैं, जो यूरोप में पूर्व सर्वोच्च सहयोगी कमांडर हैं ।

 

श्री जोन्स ने अन्य समस्याओं के अलावा अफीम की बढ़ती हुई खेती और अफगानिस्तान की कम प्रशिक्षित पुलिस की ओर भी इशारा किया और कहा कि अफगान सरकार की जवाबदेही के बिना नाटो सैनिकों का कितना भी बड़ा योगदान पर्याप्त नहीं होगा ।

 

"मेरे विचार में करज़ई सरकार को वह कार्य करने के लिए, जो वह कर सकती है, अपने प्रभाव का विस्तार और पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए तथा वे कार्य करने के लिए, जिसकी अपेक्षा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उस सरकार से करता है, जो विश्व के इतने सारे देशों के पैसे और जिंदगियों के बलिदान से लाभान्वित हो रहा है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति जवाबदेह होना चाहिए ।"

 

कैलीफोर्निया के रिपब्लिकन एड रॉयस को यह भरोसा करना मुश्किल लगता है कि अमेरिका की सहायता राशि से पाकिस्तान के अग्रिम क्षेत्रों में स्थिरता लाई जा सकती है ।

 

"मेरे विचार में हम पाकिस्तान के बारे में अपनी मानसिकता और अपने विचारों के अनुसार सोच रहे हैं, बजाय इसके कि उसके साथ वैसे ही निपटा जाए, जैसा कि वह है और मेरे विचार में वहां ऐसा ही होता रहेगा, क्योंकि पाकिस्तानी समाज में जो तेजी से बदलाव होता हम देख रहे हैं, वह मुख्य रूप से देश का तालिबानीकरण है, क्योंकि इन मदरसों से ज्यादा-से-ज्यादा छात्र बाहर आ रहे हैं ।"

 

डेमोक्रेट सदस्य पाकिस्तान के प्रति बुश प्रशासन की आलोचना करने के लिए सरकारी जवाबदेही कार्यालय के अमेरिकी सहायता के बारे में निकाले गए निष्कर्षों का हवाला दे रहे हैं और सीनेट के दो सांसदों ने इस हफ्ते कहा कि भविष्य में दी जाने वाली सहायता के लिए यह कठोर गारंटी दी जानी चाहिए कि इस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद से लड़ने के लिए किया जा रहा है ।

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