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बर्मा में तूफान के संकट के बावजूद संवैधानिक जनमत संग्रह कराया गया

10/05/2008

An unidentified man votes Saturday, May 10, 2008, in Myanmar controversial referendum at a polling station at Hlaeuk Township near Yangon.AP
An unidentified man votes  in Myanmar controversial referendum at a polling station at Hlaeuk Township near Yangon.
बर्मा की सैन्य सरकार ने  संवैधानिक जनमत संग्रह कराया, हालांकि एक हफ्ते पहले आए समुद्री तूफान के बाद, जिसमें कम-से-कम 62,0000 लोग मृत या लापता हैं, लोग सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं । आलोचकों ने इस जनमत संग्रह को दिखावा बताया है ।

 

देश के कुछ हिस्सों में जनमत संग्रह हुआ । इस हफ्ते के शुरू में सरकार ने तूफान से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में मतदान 24 मई तक स्थगित कर दिया था ।

 

राजनयिकों और सहायता एजेंसियों का अनुमान है कि तूफान और बाढ़ से 10 लाख से ज्यादा लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, इसलिए विश्लेषकों को बहुत कम मतदान होने की उम्मीद थी । बर्मा के सैन्य शासकों ने बाहरी पर्यवेक्षकों या विदेशी मीडिया को आने की अनुमति नहीं दी, जिससे यह पुष्टि करना असंभव है कि  कितने लोगों ने मतदान किया ।

 

बर्मा के भीतर कई लोगों से इंटरव्यू किया गया, जिन्होंने कहा कि वे तूफान के बाद अपने घरों की मरम्मत करने तथा पानी और भोजन ढूंढने में ज्यादा व्यस्त हैं और कुछ ने कहा कि उनका वोट देने का कोई विचार नहीं है ।

 

बर्मा के बाहर निर्वासित असंतुष्टों ने अपने देशवासियों से जनमत संग्रह के खिलाफ वोट देने के लिए कहा, जो उनकी राय में गैरकानूनी है । बर्मा की सीमा से लगे थाई शहर माई सोत में एक निर्वासित संगठन, नेशनल काउंसिल ऑफ यूनियन बर्मा के एक सदस्य सॉ डेविड थाकाबो ने कहा कि कुल मिलाकर हम इसे एक बनावटी संविधान की तरह देखते हैं, जो लोकतांत्रिक नहीं है और जो केवल बर्मा में सैन्य तानाशाही का शासन बढ़ाने के लिए है ।

 

बर्मी सैन्य सरकार ने कहा है कि नया संविधान लोकतंत्र के रोड मैप का एक कदम है । संविधान में 2010 में बहुदलीय चुनाव कराने के लिए कहा गया है, जो संभवतः सरकार पर सेना का नियंत्रण खत्म कर देंगे, जो 1962 से शासन कर रही है ।

 

परंतु आलोचकों का मानना है कि सेना के जनरल सत्ता हाथ से जाने नहीं देना चाहते । नए संविधान में सेना को संसद पर 25 प्रतिशत नियंत्रण करने और वीटो करने के पूर्ण अधिकार दिये गए हैं । जिस संवैधानिक सभा में 200 पृष्ठ का यह दस्तावेज तैयार किया गया था, उसमें प्रमुख विपक्षी दल, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया था ।

 

आलोचकों का कहना है कि यह संविधान उन बर्मी नागरिकों को राजनीतिक पदों से वंचित रखेगा, जिनके जीवन साथी या बच्चे विदेशी हैं । पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह धारा विपक्षी नेता आंग सान सू ची को सत्ता से बाहर रखने के उद्देश्य से लगाई गई है, जो एक ब्रिटिश नागरिक की विधवा और नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की सदस्य हैं । यह नोबेल शांति पुरस्कार विजेता पिछले 18 वर्षों में ज्यादातर समय अपने घर में नजरबंद रही हैं । 1990 में उनकी पार्टी को संसद में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं, लेकिन सैन्य सरकार ने उसे सरकार नहीं बनाने दी थी ।  

 

अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अन्य सदस्यों ने इस जनमत संग्रह को दिखावा बताया है और सरकार से इसे रद्द करने के लिए कहा है, विशेषकर इसलिए कि समुद्री तूफान के बाद सरकार विनाश से जूझ रही है ।

 

बर्मा के अंदर जिन लोगों से संपर्क किया गया, उन्होंने संकेत दिया कि तूफान आने के बाद सैन्य नेतृत्व ने बहुत धीमी प्रतिक्रिया की, जिससे लोगों में गुस्सा भड़क रहा है । प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सबसे बुरी तरह प्रभावित इरावाडी डेल्टा क्षेत्र में तूफान आने के एक हफ्ते बाद भी हजारों लोगों को भोजन और अन्य सामग्री नहीं मिली है, जबकि सरकार उन विदेशी राहत कार्यकर्ताओं को आने नहीं दे रही है, जो वहां जाना चाहते हैं और दुनिया भर से देश में आ रही मानवीय सहायता बांटने में मदद करना चाहते हैं ।

 

सैन्य नेतृत्व सहायता स्वीकार करने का इच्छुक है, लेकिन उसने जोर देकर कहा है कि यह सहायता वह खुद बांटेगा और विदेशी सहायता कार्यकर्ताओं को नहीं बांटने देगा ।

 

राष्ट्र संघ ने पीड़ितों की मदद के लिए 18.7 करोड़ डॉलर देने की अपील की है । राष्ट्र संघ के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आपात्कालीन खाद्य पदार्थों को विमान द्वारा भेजना फिर शुरू कर दिया है, जो बर्मी अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को रंगून में हवाई अड्डे पर इस सामग्री पर कब्जा करने के बाद स्थगित कर दिया गया था ।

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