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राष्ट्र संघ ने पैसे की कमी के कारण इराकी शरणार्थियों के लिए सहायता बंद होने की चेतावनी दी

10/05/2008

Iraqis wait outside UNHCR office in Duma, 15 kms north of Damascus, Syria, to register their names, 13 Feb 2008
Iraqis wait outside UNHCR office in Duma, 15 kms north of Damascus, Syria, to register their names.
राष्ट्र संघ शरणार्थी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि उसे हजारों इराकी शरणार्थियों के लिए चलाए जा रहे सहायता कार्यक्रम या तो स्थगित करने पड़ सकते हैं या उनमें कटौती करनी पड़ सकती है, क्योंकि उसे 26.1 करोड़ डॉलर की जरूरत है, लेकिन केवल आधा पैसा ही मिला है ।

 

राष्ट्र संघ शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि इराक में अंतर्राष्ट्रीय रुचि कम होते जाने का करीब 50 लाख लोगों पर, जो अपने घरों से भाग आए हैं, बहुत बुरा असर पड़ रहा है । इनमें से करीब आधे पड़ोसी देशों में शरणार्थी हैं । इनमें से 20 लाख से ज्यादा सीरिया और जोर्डन में हैं, जिनका इन देशों के संसाधनों पर बहुत बोझ पड़ रहा है ।

 

राष्ट्र संघ शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता रॉन रेडमोंड ने कहा कि पिछले महीने सीरिया में करीब 1.3 लाख शरणार्थियों को खाद्य सहायता मिली थी और करीब 40,000 को सस्ती दरों पर स्वास्थ्य सेवा मिली थी । उन्होंने कहा कि उनमें से बहुत से लोगों के पास पैसा खत्म होता जा रहा है और उनके लिए इस पूरे क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि होने के कारण जीवित रहना मुश्किल होता जा रहा है ।

 

उन्होंने कहा कि 2.5 लाख लोगों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रम खतरे में है, क्योंकि राष्ट्र संघ एजेंसी के पास पैसे का अभाव है ।

 

उन्होंने कहा कि हमने इराकियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए हैं । इनमें बहुत अधिक कटौती करनी पड़ सकती है । गंभीर या असाधारण रोगों से ग्रस्त लोगों को मिलने वाली विशेष चिकित्सा पूरी तरह बंद की जा सकती है । अगस्त तक हम इराकियों की सभी बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतें पूरी नहीं कर सकेंगे । बहुत से गंभीर रूप से बीमार इराकियों को हर महीने मिलने वाली दवाइयां देना मुश्किल हो जाएगा ।

 

श्री रेडमोंड ने कहा कि सीरिया और जोर्डन में लाखों शरणार्थियों के लिए खाद्य सहायता बंद की जा सकती है, जिससे बहुत से इराकियों की हालत और खराब हो जाएगी ।

 

उन्होंने कहा कि ये परिवार इतने गरीब हैं कि इनके बच्चे स्कूल जाने के बजाय काम करने को मजबूर हैं । उन्हें सड़कों पर काम करते हुए, भीख मांगते हुए या बाल-श्रम करते हुए देखा जा सकता है । यह चिंता का बड़ा कारण है ।

 

श्री रेडमोंड ने कहा कि जिन परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं, उन्हें जीवित रहने में विशेष रूप से दिक्कत हो रही है । उन्होंने कहा कि जो महिलाएं अपने परिवारों के लिए एकमात्र कमाने वाली हैं, उन्हें अक्सर वेश्यावृत्ति जैसे धंधे करने पड़ते हैं ।

 

उन्होंने कहा कि शरणार्थियों का शोषण किये जाने की ज्यादा संभावना रहती है, विशेषकर तब जब उन्हें ऐसी सहायता न मिले, जिसकी उन्हें जरूरत है ।

 

उन्होंने कहा कि ईंधन, भोजन के मूल्य और किराए बेहद बढ़ जाने के कारण पैसे का संकट बढ़ गया है ।

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