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| Indian External Affairs Minister Pranab Mukherjee |
केंद्र सरकार को भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे को लागू करने के मुद्दे पर वामपंथी दलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है । विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस से टेलीफोन पर बातचीत की और इस बारे में सरकार की कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी ।
अधिकृत सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर बातचीत की, जिसके दौरान श्री मुखर्जी ने परमाणु मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन और वामपंथी दलों की समिति की पिछली बैठक के बारे में सुश्री राइस को बताया ।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका परमाणु समझौते को अतिशीघ्र सम्पन्न करना चाहता है । सुश्री राइस यह जानना चाहती थी कि इस समझौते के क्रियान्वयन के बारे में कितनी प्रगति हुई है । समझा जाता है कि उन्होंने इस सौदे को जल्दी-से-जल्दी सम्पन्न करने की जरूरत पर जोर दिया ।
सूत्रों ने बताया कि श्री मुखर्जी ने उनसे कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को पूरी करने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन वामपंथी दलों के कड़े विरोध के कारण मुश्किलें आ रही हैं ।
अमेरिका ने इस समझौते को मई के अंत तक अमेरिकी कांग्रेस में अंतिम मतदान के लिए पेश करने का फैसला किया था, क्योंकि ऐसा न होने पर इस समझौते को पारित कराने की संभावना बहुत कम हो सकती है ।
परंतु अमेरिकी कांग्रेस में अंतिम मतदान के लिए पेश किये जाने से पहले भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सुरक्षा उपायों का समझौता भी करना है और 45 देशों के न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप से इस मामले में रियायत हासिल करनी है । वामपंथी दलों के विरोध के कारण ये दोनों चरण सम्पन्न नहीं हो पा रहे हैं । चूंकि संप्रग सरकार के लिए वामपंथी दलों का समर्थन जरूरी है, इसलिए सरकार उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है ।
भारत ने आईएईए के साथ सुरक्षा के उपायों पर समझौते के बारे में वार्ता पूरी कर ली है, लेकिन वामपंथी दलों के राजी न होने के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं कर सका है .