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| Residents walk past houses destroyed by Cyclone Nargis in Bogalay, Burma. |
बर्मा में 3 मई को आए विनाशकारी तूफान में बच गए करीब 10,000 लोगों ने भोजन, साफ पानी और दवाई की खोज में बुरी तरह प्रभावित इरावाडी डेल्टा क्षेत्रों को छोड़ दिया है । सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि 23,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और करीब 37,000 लोग लापता हैं । अंतर्राष्ट्रीय सहयाता एजेंसियों ने आगाह किया है कि अगर भुक्तभोगियों के पास जल्द-से-जल्द और अधिक मदद नहीं भेजी गई तो स्वास्थ्य का भारी संकट पैदा हो सकता है । बैंकॉक स्थित दक्षिण-पूर्वी एशियाई ब्यूरो से वी.ओ.ए के लुइस रमिरेज़ की रिपोर्ट-
मौके से भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि हजारों लोग म्याउंग म्या शहर में आते जा रहे हैं । यहां राष्ट्र संघ और कुछ अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने सीमित स्तर पर राहत अभियानों की शुरुआत की है । हालांकि बर्मा की सरकार दूसरे देशों से छोटी मात्रा में सहायता स्वीकार कर रही है, लेकिन अभी भी वह बेहद जरूरी स्वास्थ्य टीमों सहित विदेशी राहतकर्मियों को देश में आने की इजाजत देने से इन्कार कर रहा है । पड़ोसी देश थाईलैंड में कई राहतकर्मी वीज़ा का इंतजार कर रहे हैं ।
ब्रिटेन की सहायता एजेंसी, ऑक्सफेम की क्षेत्रीय निदेशक सारा आयरलैंड ने कहा है कि 15 लाख लोगों पर भोजन, पानी, सफाई और जान बचाने के लिए बुनियादी चीजों के अभाव की वजह से मरने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन इन चीजों की आपूर्ति की इजाजत नहीं दी जा रही है । उन्होंने बैंकॉक में पत्रकरों से कहा- हमें लगता है कि पानी के अनेकों स्रोत पहले से ही प्रदूषित हो चुके हैं और बाल्टी जैसी मामूली चीज की भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है । इसलिए अगर लोगों के पास अगर पानी रखने की जगह नहीं है ताकि वे यह पता लगा सकें कि वह साफ और सुरक्षित है या नहीं तो यह एक बड़ी कठिन स्थिति है । दुबई में हमारे गोदामों में काफी संख्या में फालतू बाल्टियां पड़ी हैं । हम वहां उन्हें भेज सकें, इसके लिए हम चाहते हैं कि हमें वहां जाने दिया जाए ।
बर्मा की सरकार अपने बजट में स्वास्थ्य सेवा पर केवल 4 प्रतिशत खर्च करती है, इसलिए वहां की स्वास्थ्य सुविधा पर पहले से ही भारी बोझ है । वहां के अस्पताल पहले से ही भरे हुए हैं । स्वास्थ्यकर्मियों को काफी काम करना पड़ रहा है और वे थके हुए हैं । इस स्थिति के बावजूद वहां की सैन्य सरकार विदेशी स्वास्थ्य टीमों को घुसने नहीं दे रही ।
वर्ल्ड विजन नामक संगठन का राहत अभियान म्याउंग म्या में शुरू हो गया है और चल रहा है । संगठन के अनुसार, वहां उपलब्ध सुविधाएं तूफान से बचे लोगों को आपात्कालीन स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने में सक्षम नहीं हैं । वर्ल्ड विजन के सेमसन जयकुमार मोहन का कहना है कि बचे हुए लोगों के बीच रोगों के फैलने का खतरा है, जिसके संकेत सामने आ रहे हैं । उन्होंने कहा- हमें यह सूचना मिल चुकी है कि रोगों के फैलने का खतरा है । लोगों के बीच डायरिया के मामले की सूचना हमारे पास आ चुकी है । कोलरा होने में बहुत समय लगता है और यह कभी भी फैल सकता है । यह कुछ सप्ताहों या कुछ दिनों में फैल सकता है । यह कब हो सकता है, हम नहीं बता सकते क्योंकि दुनिया के देशों को पहले कभी इस तरह की परिस्थिति से पाला नहीं पड़ा है ।
वर्ष 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी और 1991 में बंग्लादेश में आए तूफान सहित पूर्व में घटी बड़ी आपदाओं में अंतर्राष्ट्रीय सहायता के अपेक्षाकृत अधिक जल्दी पहुंचने के बावजूद रोग फैलने की घटनाएं हो चुकी हैं । राहत संगठनों को डर है कि बर्मा में जो स्थिति है, उसमें इसका फैलना लाजिमी है । यहां सहायता अभियान को रोका जा रहा है ।
प्रेक्षकों का कहना है कि बर्मा की सैन्य सरकार को यह डर है कि पश्चिमी देशों के लोग यहां आकर गड़बड़ी फैला सकते हैं । यही वजह है कि वे भारी संख्या में राहतकर्मियों को आने की इजाजत देने से हिचक रहे हैं । ऑक्सफेम के सुसान आयरलैंड ने रविवार को बर्मा की सरकार से अपनी जनता की खातिर राजनीतिक चिंताओं को परे करने की अपील की । उन्होंने कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है । यह वहां सहायता पहुंचाने एवं वहां ऐसे लोगों को भेजने का समय है, जो सहायता पहुंचा सकें । इंडोनेशिया जैसे देशों में हमारा अनुभव रहा है कि अगर सरकार कस्टम और क्लेयरेंस जैसी बंदिशों को उठा ले तो तेजी से सहायता देने में मदद मिलती है । अचेह में ऐसा ही हुआ था, इसलिए हम सभी संबद्ध लोगों से यह सोचना की गुजारिश करते हैं कि वहां तेजी से सहायता पहुंचाने के लिए क्या करना जरूरी है ।
बर्मा की सरकार ने बहुत कम सहायता संगठनों को उस देश में काम करने की इजाजत दी है । ये संगठनों मुख्य रूप से बर्मा के स्थानीय कर्मचारियों की मदद से काम कर रहे हैं । वर्ल्ड विजन नामक संगठन ने कहा है कि उसे दो विदेशी विशेषज्ञों को बर्मा में भेजने का वीज़ा ही मिला है ।