(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
 |
| Nawaz Sharif |
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कहा है कि उनकी पार्टी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से निकलने का फ़ैसला किया है, क्योंकि दोनों प्रमुख पार्टियों में बर्खास्त न्यायाधीशों को पुनः बहाल करने के मामले में समझौता नहीं हो सका । सोमवार को श्री शरीफ ने कहा कि उनकी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ पार्टी के सदस्य 6 हफ्ते पुरानी सरकार में अपने मंत्री पदों से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन उन्होंने यह वायदा भी किया कि उनकी पार्टी विपक्ष में नहीं बैठेगी ।
रविवार को लंदन में वार्ता के नवीनतम दौर के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन के नेता नवाज़ शरीफ ने कहा कि गंभीर प्रयास करने के बावजूद दोनों पार्टियां इस प्रतिरोध को सोमवार से पहले सुलझाने में असफल रहीं । समझौता करने के लिए उन्होंने सोमवार की समय सीमा तय की थी ।
श्री शरीफ और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता आसिफ अली ज़रदारी के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन पिछले साल राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ द्वारा बर्खास्त किये गए न्यायाधीशों की बहाली की प्रक्रिया पर उनमें सहमति नहीं हो सकी थी । पहले दोनों नेताओं ने संसदीय प्रस्ताव के जरिये 12 मई तक न्यायाधीशों को बहाल करने का संकल्प जताया था ।
मुख्य मतभेद यह है कि सर्वोच्च न्यायालय के किन न्यायाधीशों को अधिकार दिये जाएं । श्री शरीफ की पार्टी बर्खास्त न्यायाधीशों को बहाल करना चाहती है और उन्हें ही यह फैसला करने का अधिकार देना चाहती है कि श्री मुशर्रफ द्वारा वैकल्पिक संविधान के तहत नियुक्त किये गए न्यायाधीशों को बहाल रखा जाए या नहीं । पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का तर्क है कि श्री मुशर्रफ द्वारा नियुक्त किये गए न्यायाधीशों को भी पद पर बने रहने देना चाहिए ।
श्री मुशर्रफ ने पिछले साल इन न्यायाधीशों को इसलिए बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि उन्होंने श्री मुशर्रफ के पाकिस्तान का सेनाध्यक्ष रहते हुए पुनः राष्ट्रपति चुने जाने की वैधता को चुनौती दी थी ।
राष्ट्रपति ने न्यायपालिका के और विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी के पर कतरने के प्रयास किये थे, जिससे एक मजबूत विपक्षी आंदोलन खड़ा हो गया था और वकील तथा न्यायाधीश सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने लगे थे ।
श्री एत्जाज़ एहसान वकीलों के आंदोलन के नेता हैं, जो लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जितनी जल्दी संभव हो, बर्खास्त न्यायाधीशों को बहाल किया जाए । सोमवार को इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि वह सोमवार की समय सीमा बीतने पर नाराज हैं ।उन्होंने कहा कि हम इसकी कड़ी भर्त्सना करते हैं कि न्यायाधीशों को बहाल नहीं किया गया है और हम उन ताकतों का विरोध करते रहेंगे, जो वैकल्पिक संविधान के तहत नियुक्त किये गए जजों को पद पर बनाए रखना चाहती हैं ।
एक अन्य घटनाक्रम में आज राष्ट्रमंडल ने ऐलान किया कि वह पाकिस्तान की सदस्यता निलंबित करने का फैसला वापस ले रहा है । पिछले साल राष्ट्रपति मुशर्रफ के आपात्काल लागू करने के बाद राष्ट्रमंडल ने पाकिस्तान की सदस्यता निलंबित कर दी थी । यह 53 देशों का संगठन है, जिसमें ज्यादातर ब्रिटेन के पूर्व उपनिवेश हैं ।