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| Nepal's King Gyanendra greets his well-wishers during a public appearance at Dachinkali temple in the outskirt of Katmandu, 12 May 2008 |
नेपाल सरकार ने 240 वर्ष पुरानी राजशाही खत्म करने की तिथि तय कर ली है, जबकि राजा ने प्रतीकात्मक भूमिका बनाए रखने के लिए कहा है ।
देश के नए माओवादी नेताओं ने राजा ज्ञानेंद्र से 28 मई से पहले स्वेच्छा से गद्दी छोड़ने के लिए कहा है । 601 सदस्यों की नव-निर्वाचित संवैधानिक सभा की बैठक पहली बार इस तिथि को राजशाही खत्म करने और नेपाल को गणतंत्र की तरह स्थापित करने के लिए होगी ।
गैर-सरकारी शाही दूत और पूर्व मंत्री कमल थापा ने मंगलवार को कहा कि राजा को सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों के साथ प्रतीकात्मक भूमिका की इजाजत दी जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि जब तक असेंबली नया संविधान नहीं बनाती, तब तक उस मुद्दे पर फैसला नहीं होना चाहिए ।
सोमवार को राजा ज्ञानेंद्र ने एक हिंदू समारोह में भाग लिया, हालांकि वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देते हैं ।
राजा ज्ञानेंद्र ने 2005 में सत्ता पर पूरा अधिकार कर लिया था, जिसके बाद वह लोकप्रिय नहीं रहे थे । इसके अगले वर्ष देश भर में हुए आंदोलनों के बाद उन्हें अपना तानाशाही शासन छोड़ना पड़ा था ।
पिछले महीने नेपाल में हुए चुनावों में माओवादी विजयी हुए थे, जिन्होंने राजशाही खत्म करने और संघीय गणराज्य का स्थापना करने का संकल्प किया था । पूर्व विद्रोही एक दशक तक चले गृह युद्ध के बाद, जिसमें कम-से-कम 13,000 लोग मारे गए थे, 2006 में एक शांति समझौते को मान गए थे ।
शाही दूत ने कहा कि राजा ज्ञानेंद्र राजशाही खत्म किये जाने के बाद नेपाल नहीं छोड़ेंगे ।