(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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| Pakistan's former PM Nawaz Sharif |
पाकिस्तान की नाजुक गठबंधन सरकार फरवरी में हुए चुनावों में सत्ता में आने के बाद उस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई प्रगति नहीं कर सकी है, जिस पर वह चुनाव जीती थी । यह मुद्दा राष्ट्रपति मुशर्रफ द्वारा गत् नवंबर में बर्खास्त किये गए न्यायाधीशों की बहाली का है । लाहौर में वी.ओ.ए संवाददाता, बैरी न्यूहाउस को दिये इंटरव्यू में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने कहा कि न्यायाधीशों की बहाली देश की अन्य समस्याओं के हल से सीधे जुड़ी है ।
फरवरी के चुनावों में नवाज़ शरीफ की पार्टी राष्ट्रीय असेंबली में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, क्योंकि श्री शरीफ ने राष्ट्रपति मुशर्रफ का कड़ा विरोध किया था और अब भी वे जोर दे रहे हैं कि श्री मुशर्रफ को पद छोड़ देना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि लोग वह परिवर्तन देखना चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने वोट दिया था । पहला परिवर्तन वे यह देखना चाहते हैं कि देश का नया राष्ट्रपति हो । इसलिए कि वे अच्छी तरह जानते हैं कि मुशर्रफ के 8 वर्ष के शासन में उनके लिए ढेर सारी समस्याएं खड़ी हुई हैं ।
पाकिस्तान की एक समस्या अफगान सीमा के पास तालिबान विद्रोह है, जो पिछले वर्ष के दौरान फैल गया है और बड़े शहरों में आत्मघाती बम-विस्फोट हुए हैं । देश के सामने गहराता आर्थिक संकट भी है और खाद्य पदार्थों के मूल्य बढ़ते जा रहे हैं तथा बिजली की कमी हो गई है ।
परंतु इस्लामाबाद सरकार मुख्य रूप से बर्खास्त न्यायाधीशों की बहाली पर जोर दे रही है, जिन्हें देश भर के मुखर वकील संगठनों का मजबूत समर्थन हासिल है । श्री शरीफ ने यह सुझाव खारिज कर दिया कि सरकार में न्यायाधीशों के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है और वह अन्य गंभीर समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है ।
उन्होंने कहा कि मेरे विचार में यह मुद्दा लोकतांत्रिक सरकार को बना या बिगाड़ सकता है, इसलिए अगर हम इस मुद्दे को नजरअंदाज करें और ऐसे ही जाने दें तो हम देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ा अपराध कर रहे होंगे ।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन और आसिफ अली ज़रदारी की पाकिस्तान पीपल्स पार्टी में जजों की बहाली कैसे की जाए, इस पर मतभेद हैं । पीपीपी का आग्रह है कि संविधान के साथ विवाद को रोकने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं । पीएमएल-एन चाहती है कि मौजूदा न्यायाधीशों के स्थान पर बर्खास्त न्यायाधीशों को नियुक्त किया जाए ।
इस महीने इस मुद्दे पर मतभेद के चलते पीएमएल-एन के 9 मंत्रियों ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखेंगे । श्री शरीफ ने कहा है कि सरकार को राष्ट्रपति मुशर्रफ की छाया से बाहर आना ही होगा । उन्होंने कहा कि मुशर्रफ ने पाकिस्तान पर शासन किया है और अमेरिका के साथ उनके रिश्ते लंबे समय से हैं ।
उन्होंने कहा कि मेरे विचार में मुशर्रफ मुशर्रफ हैं और पाकिस्तान पाकिस्तान है । उन्हें मुशर्रफ को पाकिस्तान या पाकिस्तान को मुशर्रफ नहीं समझना चाहिए । अभी तक अमेरिका की नीति पाकिस्तान की जनता का समर्थन करने और देश के साथ, न कि एक व्यक्ति के साथ, मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की रही है ।
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में अमेरिका की आलोचना राष्ट्रपति मुशर्रफ का समर्थन करने के लिए की गई है, जबकि उन्होंने सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी थी । परंतु चुनाव होने के बाद अमेरिकी राजनयिक देश में श्री शरीफ समेत सभी मुख्य राजनीतिक ताकतों से मिले हैं ।
पूर्व प्रधानमंत्री और आसिफ अली ज़रदारी इस समय देश के सबसे बड़े राजनेता हैं और न्यायधीशों के मुद्दे पर उनमें जारी गतिरोध पर चिंता जताई जा रही है । श्री शरीफ ने कहा है कि उन्हें समाधान निकलने की आशा है और वह सुधारों के लिए जनता की बेचैनी को समझते हैं । उन्होंने कहा कि सारे पाकिस्तानी जल्दी ही परिवर्तन चाहते हैं ।