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खाद्य पदार्थों के बढ़ते मूल्य -बाज़ार की सट्टेबाज़ी

21/05/2008

During rally, Senegal's President Abdoulaye Wade tried to garner support for his new plan to combat rising food prices
Plan to combat rising food prices
विश्व में खाद्य पदार्थों के बढ़ते मूल्यों के लिए जैव ईंधन उत्पादन, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, निर्यात पर रोक से लेकर आपूर्ति और मांग, जिंस बाज़ारों की सख्त हालत और निवेशकों की सट्टेबाज़ी तक जैसे कारणों को दोषी ठहराया गया है । हालांकि ज़्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी एक कारण से संकट पैदा नहीं हुआ है, पर इनमें से बहुत सारे विशेषज्ञ मूल्य वृद्धि के लिए जिंस के वायदा कारोबार में सट्टेबाज़ी को दोषी ठहराते हैं ।

फोकस में, वी.ओ.ए के ऐदा अकेल कृषि उत्पादों के मूल्य बढ़ाने में बाज़ार में होने वाली सट्टेबाज़ी की भूमिका पर नज़र डाल रहे हैं ।

पिछले साल के दौरान, चावल और गेंहू के मूल्य दोगुना से भी ज़्यादा हो गए । विश्व बैंक के अनुसार, 2007 में मकई के मूल्य में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सोयाबीन 42 प्रतिशत मंहगा हो गया । राष्ट्र संघ ने कहा है कि पिछले नौ महीनों में खाद्य पदार्थों के मूल्यों में कुल मिलाकर 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका अर्थ है कि बहुत से विकासशील देशों में लोगों को अपनी आय का 60 प्रतिशत तक भोजन पर खर्च करना पड़ा । पिछले साल अन्य जिंसों, जैसे धातुओं और खनिजों की कीमतें दोगुनी या तीन गुनी हो गईं ।

पिछले वर्ष शिकागो मरकैन्टाइल एक्सचेंज और शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड के विलय के बाद बनी एक बड़ी जिंस कंपनी, सीएमई ग्रुप  के डेविड लेहमैन कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में अमेरिकी सर्व-जिंस सूचकांक, जिसमें जिंस में व्यापार करने वाली कंपनियां और उनके शेयरों के मूल्य दर्ज होते हैं, के मूल्य में लगातार वृद्धि हुई है ।

"सूचकांक के स्तर पर, 1999 के मध्य से, खाद्य जिंस सूचकांक में 98 प्रतिशत वृद्धि हुई है । सभी जिंसों के लिए सूचकांक 286 प्रतिशत बढ़ा है और कच्चे तेल का सूचकांक 547 प्रतिशत बढ़ा है । सभी जिंसों में मूल धातुएं, बहुमूल्य धातुएं शामिल हैं । इसलिए खाद्य पदार्थों में जो मूल्य वृद्धि इतनी अधिक लगती है, वह वास्तव में अन्य श्रेणियों की तुलना में काफी कम है ।"


उच्च ऊर्जा लागत, जैव ईंधन के उत्पादन के लिए कृषि की भूमि की बढ़ती मांग और उपयोग ने जिंस की मूल्य वृद्धि में योगदान दिया है । लेहमैन कहते हैं कि इसने बहुत सारे निवेशकों के लिए जिंस के वायदा कारोबार में आकर्षक अवसर पैदा किये हैं ।

"जिंस वायदा कारोबार का संपत्ति श्रेणी की तरह इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है । इसलिए जो निवेशक हमेशा शेयरों और बांड में निवेश करते हैं, उन्होंने यह समझ लिया है कि जिंस के उपयोग से पोर्टफोलियो में(अर्थात अपने समूचे निवेश में) विस्तार किया जा सकता है, पोर्टफोलियो में कुल जोखिम का स्तर कम हो जाता है, और इस तरह, लाभ बढ़ जाता है ।" 

हाल के वर्षों में अमेरिकी हेज फंड्स, सट्टेबाजों और व्यवसायिक और निजी निवेशकों ने जिंस वायदा कारोबार में अरबों डॉलर लगाए हैं । आयोवा स्टेट युनिवर्सिटी के कृषि और ग्रामीण विकास केंद्र के अर्थशास्त्री चैड हार्ट कहते हैं कि इसका विश्व बाज़ारों पर बहुत बड़ा असर पड़ा है ।

"हमारे बहुत सारे निवेशक मुद्रास्फीति और कमजोर डॉलर से सुरक्षित रहने के लिए अपनी पूंजी को न केवल कृषि जिंसों में, बल्कि आमतौर पर सभी तरह के भौतिक जिंसों में लगा रहे हैं । परंतु इनमें से कुछ जिंसों में, खासकर कृषि उत्पादों में, केवल डॉलरों में ही, जितने बड़े पैमाने पर पैसा लगाया जा रहा है, उसका उन बाज़ारों पर, जिनमें वे प्रवेश कर रहे है, अच्छा-खासा असर पड़ रहा है ।"
 

मिनेसोटा में इंवेस्टर कमॉडिटी सर्विसेज़ के विश्लेषक, चक पियर्सन मानते हैं कि सट्टेबाज़ी का जिंस वायदा कारोबार में मूल्य बढ़ाने में योगदान है, पर वे कहते हैं कि इसके अन्य कारण भी हैं ।

 

"ज़्यादातर सट्टेबाज़ अस्थायी निवेशक हैं । इसलिए जब मूल्य बढ़ते हैं, तो वे बाज़ार में प्रवेश करते हैं और मूल्यों में बढ़ोत्तरी से मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं ।  अब बाज़ार में इक्विटी निवेशकों के हेज फंड भी हैं, जो अपने पोर्टफोलियो को मुद्रास्फीति से बचाने की कोशिश कर रहे हैं । और नियंत्रक इस पर नज़र रख रहे हैंमिसाल के लिए, यह कि ये निवेशक कितने बड़े पैमाने पर बाज़ार में प्रवेश कर रहे हैं । कुछ हेज फंड्स के लिए यह सीमा नहीं होती कि वे कितने ठेके खरीद सकते हैं क्योंकि वे हेजर्स की श्रेणी में हैं ।"

अमेरिकी कमॉडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन ने हाल ही में निवेशकों के कृषि जिंसों में लगाए जा रहे पैसे के प्रभाव की जांच की थी और पाया कि आमतौर पर उच्च वायदा कारोबार मूल्य बाज़ार के दुरुपयोग का परिणाम नहीं हैं ।

वॉशिंगटन में आर्थिक और नीति अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक, डीन बेकर का कहना है कि सट्टेबाज़ी का प्रभाव सीमित है, जबकि उच्च ऊर्जा लागत और उपभोग में वृद्धि के लंबे समय तक चलते रहने की संभावना है ।

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