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प्रमुख विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण
आडवाणी ने आज दावा किया कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील सरकार अल्पमत में आ गई है
और प्रधानमंत्री को संसद में तुरंत विश्वासमत प्राप्त करना चाहिए ।
आज नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में
राज्य सभा में विपक्ष के नेता जसवंत सिंह के साथ पत्रकारों को संबोधित करते हुए
श्री आडवाणी ने कहा कि जिस क्षण वामपंथी दल सरकार से समर्थन वापस लेंगे, उसी समय
प्रधानमंत्री के लिए लोकसभा में विश्वास प्राप्त करना आवश्यक होगा ।
उन्होंने कहा कि अब संप्रग सरकार अल्पमत में है ।
भाजपा की मांग है कि सरकार तुरंत संसद की बैठक बुलाए और उसे पूरी तरह विश्वास में
ले । श्री आडवाणी लोकसभा मे विपक्ष के नेता हैं । उन्होंने कांग्रेस पर सरकार बचाए
रखने के लिए समाजवादी पार्टी के साथ सौदेबाजी करने का आरोप लगाया ।
उन्होंने कहा कि सरकार विश्वासमत प्राप्त नहीं करेगी
तो भाजपा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मांग करेगी कि वह प्रधानमंत्री को ऐसा करने
का निर्देश दें ।
इसके जवाब में आज कांग्रेस ने श्री आडवाणी की जम कर
आलोचना की । कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि अभी तक किसी ने सरकार से
समर्थन वापस नहीं लिया है, इसलिए विश्वासमत प्राप्त करने का सवाल ही कहां उठता है
।
उन्होंने श्री आडवाणी पर आरोप लगाया कि जब
प्रधानमंत्री जी-8 शिखर सम्मेलन में भाग लेने जापान जा रहे हैं, तब वह इस तरह के
गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं । उन्होंने कहा कि श्री आडवाणी ऐसी मांगें रख कर
अस्थिरता क्यों पैदा कर रहे हैं ।
श्री तिवारी ने कहा कि सरकार और देश की राजनीति में
कोई अस्थिरता नहीं है । यह सिर्फ विपक्ष के नेता के दिमाग में है
गौरतलब है कि संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे
वामपंथी दल भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उन्होंने सरकार
को इस बारे में अपना रवैया स्पष्ट करने के लिए 7 जुलाई तक का समय दिया है । अगर
केंद्र सरकार इस समझौते पर आगे बढ़ने का फैसला करेगी तो वामपंथी दलों ने सरकार से
समर्थन वापस लेने की धमकी दी है ।
अगर ऐसा हुआ तो संप्रग सरकार अल्पमत में आ जाएगी ।
इसलिए कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को भारत-अमेरिकी परमाणु सौदे के मुद्दे पर
समर्थन देने के लिए मना लिया है । इसी वजह से भाजपा ने संप्रग पर समाजवादी पार्टी
से सौदेबाजी करने का आरोप लगाया है ।
इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा
कि परमाणु समझौता राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है और यह ऊर्जा हासिल करने के लिए
किया जा रहा है । इसलिए जो भी पार्टी इस मुद्दे पर हमें समर्थन देगी, उसका हम
स्वागत करेंगे । उन्होंने अपनी पार्टी पर राजनीतिक अवसरवादिता के आरोप को खारिज कर
दिया ।