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| Student activists of Nepal's main political parties. |
नेपाल में माओवादियों ने मधेशियों के साथ वार्ता में
आए गतिरोध के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वह उसके उपजाऊ
तराई क्षेत्र को हड़पने की कोशिश कर रहा है
गौरतलब है कि नेपाल में 10 अप्रैल को हुए संवैधानिक
सभा के चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बावजूद सरकार बनाने के
माओवादियों के प्रयास अभी तक सफल नहीं हुए हैं ।
माओवादियों ने प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला
की नेपाली कांग्रेस और मधेशी पार्टियों पर आरोप लगाया है कि वे भारत की सीमा से
लगी दक्षिणी तराई पट्टी के लिए स्वायत्तता की मांग करके माओवादियों के सत्ता में
आने में बाधा डाल रहे हैं और नई दिल्ली के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं ।
माओवादियों के साप्ताहिक जनदिशा ने खबर दी है
कि श्री कोइराला ने 11 दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अभी तक अगले
मनोनीत प्रधानमंत्री प्रचंड के लिए सिंह दरबार का प्रधानमंत्री कार्यालय खाली नहीं
किया है
पत्रिका ने दावा किया है कि कोइराला-समर्थक श्री
प्रचंड को यह प्रस्ताव दे रहे हैं कि वह उन्हें राष्ट्रपति बना दें । उसने कहा है
कि मधेशी पार्टियों ने मधेश को एक स्वायत्त क्षेत्र घोषित करने की मांग भारत के
इशारे पर रखी होगी
मधेशी पार्टियों ने दो हफ्ते से भी ज्यादा समय से
तराई पट्टी को स्वायत्त क्षेत्र घोषित करने और नेपाल की सेना में मधेशियों को
अनुपात के आधार पर भर्ती करने की मांगों को लेकर संवैधानिक सभा की कार्रवाई को रोक
रखा है ।
उन्होंने सरकार बनाने या भंग करने के लिए साधारण
बहुमत की अनुमति देने के लिए संविधान में संशोधन करने के लिए बैठक नहीं होने दी है
और अपनी मांगों के पक्ष में नारे लगा रहे हैं । उनका कहना है कि संविधान में
पांचवें संशोधन के जरिये उनकी मांगें शामिल की जानी चाहिए .