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भारत को चावल, मकई, सोयाबीन की अच्छी फसल की आशा

18/07/2008

 

A vendor sells vegetables in flooded road in Ahmadabad, India, 13 Jul 2008
A vendor sells vegetables in flooded road in Ahmadabad, India
भारतीय कृषि अधिकारियों ने कहा है कि इस साल मानसून के मौसम में पर्याप्त वर्षा होने के कारण उन्हें खाद्यान्न की अच्छी फसल होने की आशा है । नई दिल्ली से अंजना पसरीचा ने खबर दी है कि खाद्य आपूर्ति में अपेक्षित वृद्धि से देश को खाद्य पदार्थों के बढ़ते हुए मूल्यों से निपटने में सहायता मिल सकती है ।

हालांकि भारत में मानसून का मौसम अभी आधा ही बीता है, लेकिन पर्याप्त वर्षा के कारण किसान खुश हैं ।

देश में केवल 40 प्रतिशत खेती की जमीन की सिंचाई की जाती है, इसलिए जून से सितंबर तक होने वाली मानसून की वर्षा किसानों के लिए बहुत जरूरी है ।

कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि सब जगह अच्छी बारिश होने के कारण इस साल उन्हें चावल, मकई और सोयाबीन की प्रचुर फसल होने की उम्मीद है । इस वर्ष के शुरू में गेहूं का भी रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था ।

भारत के लिए यह एक अच्छी खबर है, जहां लाखों गरीब लोगों को खाद्य पदार्थों के बढ़ते हुए मूल्यों की मार झेलनी पड़ रही है ।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य, अर्थशास्त्री सौमित्र चौधरी ने कहा है कि खाद्यान्न के अच्छे उत्पादन से घरेलू खाद्य कीमतों पर दबाव कम होगा ।

श्री चौधरी ने कहा कि भोजन विशेष रूप से संवेदनशील वस्तु है । गरीब लोगों की उपभोक्ता वस्तुओं में सबसे ज्यादा भोजन ही होता है और अच्छी फसल से हमें मूल्यों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी ।

अधिकारियों ने कहा है कि भारत को इस साल गेहूं आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जैसा कि वह पिछले दो सालों से कर रहा है । सरकार ने किसानों से अनाज का करीब एक-तिहाई उत्पादन खरीद लिया है और अपने भंडारों को भर लिया है, जिससे अभाव होने की चिंताएं कम हो गई हैं ।

इसके बावजूद भारत इस साल के शुरू में चावल की ज्यादातर किस्मों के निर्यात पर लगाई गई रोक संभवतः नहीं हटाएगा । इस प्रतिबंध ने विश्व में चावल के बढ़ते मूल्यों में योगदान दिया था ।

श्री चौधरी ने कहा कि अनाज के अंतर्राष्ट्रीय मूल्य भारत के लिए बहुत अधिक हैं और वह प्रतिबंध हटाने का खतरा नहीं उठा सकता ।

उन्होंने कहा कि मेरे विचार में भारत इस स्थिति में अनाज आयात नहीं करना चाहता, क्योंकि तब खाद्य के मूल्यों पर अब तक जो भी नियंत्रण लगाया गया है, वह खत्म हो जाएगा । इसलिए वे इस प्रतिबंध को हटाने से पहले खाद्यान्न मूल्य के अधिक तर्कसंगत स्तर तक गिरने की प्रतीक्षा करेंगे ।  

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं और चावल उत्पादक है और कुछ वर्ष पहले वह फालतू अनाज का निर्यात कर देता था, परंतु पिछले कुछ वर्षों में कृषि उत्पादन में गिरावट आने से यह चिंता पैदा हो गई है कि देश अपनी एक अरब से ज्यादा आबादी के लिए पर्याप्त खाद्यान्न पैदा नहीं कर सकेगा, जिससे विश्व पर और दबाव बढ़ेगा, जहां खाद्यान्न की कमी होती जा रही है ।  

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