 |
| Freedom Means Choice protest sign printed on an American flag at NOW rally in Washington |
अमेरिका के इतिहास में धार्मिक आजादी के संरक्षण के नागरिकों के अधिकार को एक खास जगह मिली हुई है । हाल ही में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि उन्होंने जिस आजादी को 1791 में पेश बिल ऑफ राइट्स में जगह दी, वह धार्मिक आजादी का अधिकार है ।
उन्होंने यह महसूस किया कि किसी भी व्यक्ति को सबसे बुनियादी अधिकार यह होना चाहिए कि वह अपनी मर्जी से अपने भगवान की पूजा करे । आज हमारा सौभाग्य है कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं, जहां इस आजादी का सम्मान किया जाता है ।
श्री बुश ने कहा कि कई ऐसे देश हैं, जहां अभी भी धार्मिक आजादी की मांग करने वाले लोगों की आवाज को कठोरता, असहिष्णुता और दमन के जरिये कुंद कर दिया जाता है । इनमें से एक देश ईरान है । यहां प्रशासन के सामीवाद-विरोधी रवैये से पूरी दुनिया में गुस्सा है । अमेरिका ने अपनी वार्षिक ताजा रिपोर्ट में धार्मिक आजादी के बारे में कहा है कि ईरान की सरकार की इस्राइल-विरोधी नीतियों और सामीवाद-विरोधी बयानों से ईरान में यहूदियों के लिए एक दुश्मनी का माहौल पैदा हो गया है । रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ईरान के यहूदी समुदाय की भविष्य में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है ।
ईरान में दूसरे लोग भी बेहद निर्दयता से सताए जा रहे हैं । उनकी एक ही गलती है कि वे दूसरे धार्मिक आस्थाओं के लोग हैं । ईरान के बहाई समुदाय के कई प्रमुख सदस्यों को इस साल बसंत ऋतु में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें एविन जेल में कई महीनों से रखा जा रहा है । उनके खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं हैं और न ही उन्हें किसी वकील की सहायता लेने दी जा रही है । ईरान की मानवाधिकार वकील शिरीन इबादी सहित नोबेल शांति पुरस्कार के छह विजेताओं ने हाल में एक बयान जारी कर ईरान के बहाई समुदाय पर बढ़ते खतरे और उन्हें तंग किये जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की । इस बयान में गिरफ्तार किये गए लोगों को तत्काल रिहा करने की अपील की गई ।
ईरान का प्रशासन ईसाई धर्म अपनाने वाला मूल ईरानियों को भी गिरफ्तार कर रहा है । एमनेस्टि इंटरनेशनल के अनुसार, हाल के महीनों में ईरान के पांच ईसाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया । ऐसा जाहिर होता है कि उन्हें उनकी आस्था की वजह से यह दंड मिला है । इनमें तीन शिराज़ शहर के और दो अमोल शहर के हैं । इन लोगों से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा और यह आशंका है कि उन्हें यातना दी जाएगी ।
बहुसंख्यक शिया मुस्लिम समुदाय के वे सदस्य, जो इस्लाम की सरकारी व्याख्या से अलग राय रखते हैं, उन्हें भी दंड का भागी बनना पड़ रहा है । धर्म और आजादी को अलग-अलग रखने की वकालत करने वाले शिया मौलवी, अयातुल्ला मोहम्मद काज़ेमिनी बोरोजर्दी को उनके अनुयायिकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया । वर्ष 2006 के अक्टूबर महीने में दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव हुआ था । अयातुल्ला पर काफिर होने का आरोप है और वे खराब स्वास्थ्य से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें जेल में बंद रखा जा रहा है ।
राष्ट्रपति बुश ने ईरान और उन देशों की सरकारों से यह आह्वान किया है कि वे बुनियादी मानवाधिकारों कासम्मान करें, जो ऐसा नहीं करते । उन्होंने उनसे तत्काल धार्मिक आजादी के दमन को बंद करने की अपील की । श्री बुश ने कहा कि हम उन देशों के नेताओं से यह अपील करते हैं कि वे अपनी मर्जी से पूजा करने केअधिकार का सम्मान करें ।