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दक्षिण-पूर्व एशियाई नेताओं ने बर्मा की सैनिक सरकार
की असाधारण सार्वजनिक आलोचना करते हुए उससे देश में लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन को
कुचले जाने के बारे में पूछा है । हालांकि उनका यह कदम स्वागत योग्य है, पर आशा है
कि यह रंगून में सेनाधिकारियों पर सुधार शुरू करने के लिए दबाव बढ़ाने की दिशा में
पहला कदम है ताकि उन व्यापक राजनीतिक मुद्दों को हल किया जा सके, जिनकी वजह से
उनके देश की आलोचना हो रही है ।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन, आसियान के
सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने सिंगापुर में हुई बैठक में बर्मा में विपक्षी
नेता आंग सान सू ची को लगातार नजरबंद रखे जाने पर गहरी निराशा व्यक्त की ।
उन्होंने सैन्य सरकार से, जो दशकों से देश पर सख्ती से शासन कर रही है, विपक्षी
नेताओं के साथ सार्थक बातचीत करने के लिए कहा है ।
आसियान एक सर्वानुमति-आधारित संगठन है, जो अपने
सदस्यों के अंदरूनी मामलों के बारे में बोलने से बचता है । चूंकि बैठक की कार्यसूची में मानवाधिकारों का मुद्दा प्रमुख था और पिछले साल के दौरान बर्मा में
राजनीतिक माहौल में गिरावट आई है, इसलिए संगठन ने फैसला किया होगा कि यह इस बारे
में बोलने का सही समय है ।
उन्हें अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने
प्रोत्साहित किया था, जिन्होंने रंगून में प्रभाव बढ़ाने का श्रेय आसियान को दिया
। उन्होंने कहा कि यह संगठन सैन्य शासकों को समुद्री तूफान नर्गिस आने के
बाद, जिसमें मई में इरावाडी डेल्टा में कम-से-कम 78,000 लोग मारे गए थे, सहायता
में बाधा डालने के उसके शुरुआती फैसले को पलटने और अंतर्राष्ट्रीय सहायता स्वीकार
करने के लिए मनाने में सफल रहा था । उन्होंने संगठन से अनुरोध किया था कि वह बर्मा
को लोकतंत्र की दिशा में बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित करता रहे ।
वास्तव में यह बर्मी जनता और क्षेत्रीय स्थिरता के
बारे में चिंतित आसियान देशों, दोनों के हित में है कि सेनाधाकारियों पर सभी
राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और लोकतांत्रिक तथा जातीय अल्पसंख्यक नेताओं के साथ
गंभीरता से संवाद करने के लिए दबाव डाला जाए ताकि लोकतंत्र में विश्वसनीय
हस्तांतरण शुरू हो सके ।