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President Bush (right) and Indian Prime Minister Manmohan Singh |
भारत में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किये गए बयान
में राजदूत डेविड मलफोर्ड ने कहा, "अमेरिका भारतीय संसद
में अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु सहयोग प्रस्ताव को मिले समर्थन का स्वागत करता है
।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति जॉर्ज बुश
ने जुलाई, 2005 में पहली बार इस प्रस्ताव की घोषणा की थी, जो भारत और अमेरिका द्वारा
अपने 60 वर्ष से भी लंबे संबंधों में किये गए समझौतों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण
है । इस प्रस्ताव के जरिये अमेरिका भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ईंधन बाजार में
पहुंच बनाने में मदद करेगा और भारत को अपने रियेक्टरों के कार्यकाल में परमाणु
आपूर्ति में किसी तरह की बाधा से दूर रखने के लिए सामरिक परमाणु ईंधन भण्डार बनाने
के प्रयास में सहायता देगा । यह समझौता किसी भी प्रकार से भारत के परमाणु हथियार
कार्यक्रम को समर्थन नहीं देता । इसका एकमात्र उद्देश्य भारत को नागरिक उपयोग के
लिए ज्यादा परमाणु ऊर्जा विकसित करने में मदद करना है और वह भारत को अपनी बढ़ती
हुई जरूरतों को पर्यावरण के लिए अनुकूल तरीके से पूरा करने में मदद करेगा ।
इसे वास्तविकता में बदलने के लिए भारत ने
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, आईएईए के साथ एक निगरानी समझौते पर बातचीत की
है, जो उसके परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए होगा । अमेरिका के सहयोग से भारत
न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के 45 देशों से भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु सामग्री
व्यापार में शामिल करने के लिए सर्वासम्मति से अनुमति लेने की कोशिश कर रहा है ।
राजदूत मलफोर्ड ने कहा कि अमेरिकी सरकार और भारत सरकार उन कदमों को तेजी से पूरा
करने के लिए, जो आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स तथा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप
द्वारा उठाए जाने हैं, आगे आने वाले दिनों में मिलकर काम करेंगी ।
इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा कर भारत सरकार ने एक साहसी
कदम उठाया है ।
अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु सहयोग समझौते के तहत
भारत अपने समूचे नागरिक कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण के लिए पेश करके
परमाणु अप्रसार की मुख्यधारा में आ जाएगा ।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के कार्यकारी प्रवक्ता
गोंज़ालो गालेगोस ने कहा कि अमेरिका भारत सरकार के साथ मिलकर अमेरिका-भारत नागरिक
परमाणु सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने के लिए काम करता रहेगा ।