 |
| AIDS, special report, conference, Mexico City |
आर्थिक मंदी और देश के भीतर बढ़ती ऊर्जा कीमतों से जूझने के बावजूद अमेरिका विदेशों में रहने वाले लोगों को मदद के प्रति वचनबद्ध है । हाल में इसके और सबूत तब सामने आए, जब अमेरिकी सांसदों ने पूरी दुनिया में एचआईवी-एड्स के फैलाव को रोकने के लिए देश के अभियान को व्यापक बनाने के पक्ष में मतदान किया ।
वर्ष 2003 से ही अमेरिका विदेशी सरकारों, समाज सेवा करने वाले समूहों और चिकित्सा क्लीनिकों को इस वायरस से लड़ने के लिए आर्थिक एवं तकनीकी सहायता मुहैया करता आ रहा है । इस वायरस की चपेट में पूरी दुनिया में करीब 3.3 करोड़ लोग आ गए हैं । पीईपीएफएआर नामक इस अभियान में अब तक 15 अरब डॉलर खर्च किया जा चुका है । इस पैसे का अधिकतर हिस्सा इस रोग से ग्रसित 17 लाख से अधिक लोगों के इलाज के लिए एंटीरेटरोवायरल दवाई खरीदने एवं उन्हें रोजमर्रे की चिकित्सा सहायता देने में खर्च किया जाता है ।
इस सहायता के लिए जिन विशेष समूहों को चुना गया है, वे अमेरिकी महाद्वीप के हैती और गुयाना, एशिया के वियतनाम और सब-सहारा अफ्रीका के इथियोपिया, बोत्सवाना, नाइजीरिया और अन्य देशों के मरीज हैं । अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्वीकृत योजना के तहत इस खर्च को अगले पांच साल में बढ़ा कर 40 अरब डॉलर कर दिया जाएगा । इसके साथ ही मलेरिया और टीबी से लड़ने के कार्यक्रमों की संख्या भी बढ़ेगी । इस बढ़े हुए पैसे से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि एड्स के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका सबसे बड़ा दानकर्ता देश है और वह आने वाले कई सालों तक इस लड़ाई के प्रति वचनबद्ध रहेगा ।
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा- पीईपीएफएआर अब तक के इतिहास में एक रोग से लड़ने के लिए समर्पित सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहल है । यह अमेरिकी जनता की असाधारण दया एवं दरियादिली की भावना का सबूत है ।