US soldiers lay wreath during ceremony for Veterans Day at Camp Eggers in Kabul, 11 Nov 2008
अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान राष्ट्रपति अब्राहम
लिंकन ने अपने प्रसिद्ध गैटिसबर्ग भाषण में अमेरिकियों से यह सुनिश्चित करने का
आह्वान किया था कि "इस धरती से आजादी का सफाया न हो" । उनके शब्दों ने इन वर्षों के दौरान बहुत से लोगों को प्रेरणा दी है, जिनमें
देश की सशस्त्र सेवाओं के लाखों सैनिक भी शामिल हैं, जिन्होंने न केवल अपने देश
की, बल्कि अन्य देशों की भी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष किया ।
आज वैटेरन्स डे (सैनिक सम्मान दिवस) पर अमेरिका इन
महिलाओं और पुरुषों को तथा कर्तव्य और बलिदान के उन मूल्यों को, जिनका वे
प्रतिनिधित्व करते हैं, सम्मानित कर रहा है । अपनी वर्दी त्यागने के लंबे समय बाद
वे इसका प्रतीक हैं कि एक स्वतंत्र देश का नागरिक होने का अर्थ क्या होता है ।
हर वर्ष 11 नवंबर को मनाया जाने वाला यह अवकाश उस
संघर्ष विराम से शुरू हुआ, जिससे पहला विश्व युद्ध समाप्त हुआ था । एशिया, अफ्रीका,
प्रशांत महासागर के बिखरे हुए द्वीपों और दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र में तथा
यूरोप के युद्ध के मैदानों में लड़ा गया "यह युद्ध सभी युद्धों
को समाप्त करने वाले युद्ध" की तरह देखा गया था । लेकिन इसके बाद अन्य युद्ध भी
हुए और 1954 में राष्ट्रपति ड्वाइट आइज़नहावर ने इस अवकाश का विस्तार उन सभी का
सम्मान करने के लिए किया, जिन्होंने युद्ध और शांति, दोनों समय में फौजी वर्दी में
सेवा की है ।
परंतु वेटेरन्स डे का मूल आशय युद्ध से नहीं है ।
यह युद्ध में मिली किसी भी जीत या हार को महिमामंडित नहीं करता, यह किसी राजनीतिक
या क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाए जाने का जश्न नहीं मनाता । बल्कि यह एक
याद करने का दिन है और इसी तरह के अवकाश ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और अन्य
देशों में होते हैं, जिनमं सेना के अनुभवी कर्मचारियों को उनकी सेवा और बलिदान के लिए
सम्मानित किया जाता है ।