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24 जनवरी  2009 

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शर्णार्थियों को अमरीका की सहायता
24/01/2009

This undated handout photo released by Thai Royal Navy on 18 Jan 2009 shows illegal immigrants from Bangladesh and Burma eating their meals
This undated handout photo released by Thai Royal Navy on 18 Jan 2009 shows illegal immigrants from Bangladesh and Burma eating their meals
पिछले वर्ष संपूर्ण विश्व में शर्णार्थियों की संख्या बढ़ कर लगभग एक करोड़ साठ लाख तक पहुंच गई जिनमें सबसे अधिक संख्या अफ़ग़ानियों, फ़िलिस्तीनियों, इराक़ियों, बर्मी, सोमालियों और सूडानियों की है । अमरीका, राष्ट्रसंघ में शर्णार्थियों के उच्चायोग, और अन्य सरकारी और ग़ैर सरकारी संगठनों के साथ मिल कर उन लोगों की सहायता करने का प्रयास कर रहा है जिन्हें जाति भेद, धर्म, राष्ट्रिकता, राजनीतिक विचारों, या किसी विशेष सामाजिक दल का सदस्य होने के कारण, दमन का शिकार होने के भय से अपने घर बार छोड़ने पड़े हैं ।

अमरीकी विदेश मंत्रालय का जन संख्या, शर्णार्थी और उत्प्रवास ब्यूरो, संपूर्ण विश्व में शर्णार्थियों और संघर्ष का शिकार हुए लोगों को सुरक्षा, सहायता और टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराता है जैसे स्वेच्छा से स्वदेश वापसी, स्थानीय मेल मिलाप और अमरीका में पुनर्वास ।

सन 2008 के वित्त वर्ष में जन संख्या, शर्णार्थी और उत्प्रवास ब्यूरो ने सहायता कार्यक्रमों के लिए एक अरब डौलर से भी अधिक प्रदान किए । इन कार्यक्रमों में संपूर्ण विश्व के दसियों हज़ार शर्णार्थियों, विस्थापितों, और संघर्षों से प्रभावित लोगों के लिए बुनियादी जीवन रक्षक कार्यक्रम जैसे पानी, शरण स्थल और स्वास्थ्य की देखभाल उपलब्ध कराना शामिल हैं ।

अमरीका सरकार ने पिछले कई वर्षों में, अफ़ग़ानिस्तान, बुरुंडी, कौंगो लोकतांत्रिक गणराज्य, लाइबेरिया, मौरीतानिया, और दक्षिणी सूडान में  दस लाख से अधिक शर्णार्थियों की स्वेच्छा से स्वदेश वापसी और समाज में पुनर्मेल में सहायता की है । सन 2008 में पाकिस्तान और ईरान से 275,000 से भी अधिक अफ़ग़ान शर्णार्थी, अफ़ग़ानिस्तान वापस आए । जब शर्णार्थी सुरक्षित रूप से स्वदेश वापस नहीं आ सकते तो अफ़्रीका, एशिया और पूर्वी योरोप के जिन देशों में वह भाग कर आए होते हैं, उन्हीं देशों में  उनका पुनर्वास एक महत्वपूर्ण समाधान बन जाता है ।

संपूर्ण विश्व में एक प्रतिशत से भी कम शर्णार्थी किसी तीसरे देश में जाकर बसते हैं । जो शर्णार्थी न तो स्वदेश वापस जा सकते हैं और न उस देश में रह सकते हैं जहां उन्होंने भाग कर शरण ली हुई होती है, उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प पुनर्वास का होता है । इससे शर्णार्थियों को अपने परिवार के उन सदस्यों से मिलने का अवसर भी प्राप्त हो जाता है, जो वहां पहले से ही पुनर्वास कर चुके होते हैं ।

अमरीका विश्व का सबसे बड़ा पुनर्वास देश है । पिछले वर्ष साठ हज़ार से भी अधिक शर्णार्थियों ने अमरीका में अपना नया जीवन शुरू किया । अमरीका में सन 1975 से लेकर अब तक  2,700,000 शर्णार्थी पुनर्वास कर चुके हें ।

अमरीका की शर्णार्थियों के प्रति सुरक्षा और सहायता की वचन बद्धता गहरी और स्थायी है । यह हमारे इतिहास का एक अंग है और अमरीकी मूलादर्शों का सार है ।


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