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| Nepal's Prime Minister-Former Nepalese rebel leader and chairman of Communist Party of Nepal, Maoist Pushpa Kamal Dahal, known as Prachanda |
प्रेस की स्वतंत्रता, एक मुक्त, लोकतांत्रिक समाज का सबसे महत्वपूर्ण आधार है । मतदान करने वाली जनता को सरकार तक पहुंचने या उसके काम काज में कमियों के बारे में बता कर, उन्हें उसका जवाब देने को प्रोत्साहित करके संस्थान की पारदर्शिता को बढ़ावा देने में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । नई सरकार के इरादों की भी यह बहुत महत्वपूर्ण परीक्षा है । अगर नई सरकार इस परीक्षा में असफल रहती है तो उसका अत्याचार के गर्त में गिरना शुरु हो जाता है ।
नेपाल की नई माओवादी सरकार को इस परीक्षा में असफल होने का ख़तरा है । पिछले वर्ष दस अप्रैल को नेपाल की माओवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने संवैधानिक सभा में बहुमत प्राप्त किया । अधिक समय नहीं हुआ था कि नई सरकार ने समाचार माध्यमों को परेशान कर देने वाला संदेश भेजा । नेपाल के राजतंत्र से लोकतंत्र में प्रवेश करने के समारोह को संबोधित करते हुए, माओवादी पार्टी के प्रमुख, पुष्प कमल दहाल ने, जो जल्दी ही प्रधान मंत्री का पद संभालने वाले थे, समाचार माध्यमों को चेतावनी दी कि अगर वह सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना करना जारी रखेंगे तो उन्हें “गंभीर परिणाम भुगतने होंगे ।” उन्होंने कहा “जनता ने हमें चुना है इसलिए अब हम और आलोचनाएं नहीं सहन करेंगे ।”
तब से नेपाल में स्वतंत्र समाचार माध्यम ख़तरे में हैं । पत्रकारों को मौत की धमकी दी गई है, उन्हें डराया धमकाया गया है, मारा पीटा गया है, उनका अपहरण किया गया है, यहां तक कि उनकी हत्या भी की गई है । क्रुद्ध जन समूह ने, जिनमें कभी कभी माओवादी पार्टी के समर्थक भी शामिल थे, सरकार की आलोचना करने वाले प्रकाशनों के कार्यालयों पर धावा बोला है । उन्होंने उपकरणों को तोड़ा फोड़ा, समाचार पत्रों के बंडल नष्ट कर दिए, और कर्मचारियों को डराया धमकाया, उन्हें मारा पीटा, जबकि इन लोगों के विरुद्ध कोई क़ानूनी कार्यवाही नहीं की गई ।
ग्यारह जनवरी को, लगभग 15 पुरुषों ने, दक्षिणपूर्वी नगर जनकपुर में, 26 वर्षीय उमा सिंह के अपार्टमेंट में ज़बरदस्ती प्रवेश किया और छुरा घोंप कर उनकी हत्या कर दी । सुश्री सिंह समाचार पत्र और रेडियो पत्रकार थीं और महिला अधिकारों की समर्थक थीं । राष्ट्रसंघ, योरोपीय समुदाय, रिपोर्टर्स विदाउट बौर्डर्स, और कई अन्य पत्रकार और मानवाधिकार संगठनों ने इस हत्या की निंदा की । एक लिखित वक्तव्य में नेपाल स्थित अमरीकी दूतावास ने कहा “ग्यारह जनवरी को जनकपुर में पत्रकार उमा सिंह की हत्या काफ़ी परेशान कर देने वाली घटना है । हम नेपाल सरकार से आह्वान करते हैं कि वह इस घटना की जांच करे और नेपाली क़ानून के अनुसार अपराधियों को सज़ा दे ।”
अमरीकी दूतावास के वक्तव्य में कहा गया “यह पता नहीं है कि नेपाल में पत्रकारों को शांत करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व कम करने के लिए किए जा रहे हमलों की श्रृंखला में यह सबसे ताज़ा हमला था या नहीं, लेकिन यह लोकतंत्र के बुनियादी अधिकार, क़ानून के नियम, पर हमला था । हिंसा की बढ़ती हुई घटनाएं, जिनमें अधिकतर महिलाओं पर किए जा रहे हमले शामिल हैं, सरकार के लिए इस आवश्यकता को रेखांकित करते हैं कि वह बुनियादी मनवाधिकारों की सुरक्षा में सुधार करे । लोकतंत्र तभी फल फूल सकता है जब इन अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की जाए ।”