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| Sri Lankan ethnic Tamils hold banners and placards with messages to save their relatives in Wanni, during a demonstration in Jaffna peninsula |
श्री लंका में, जहां लड़ाई बढ़ती जा रही है, युद्ध क्षेत्र में फंसे लगभग दो लाख पचास हज़ार नागरिकों की स्थिति बहुत ख़राब होती जा रही है और दोनों युद्ध रत पक्षों से आग्रह किया जा रहा है कि वह नागरिकों की भलाई सोचें.
पिछले पच्चीस वर्षों से लिबरेशन टाइगर्स औफ़ तमिल ईलम, यानी एलटीटीई, जिसे अमरीका ने विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची में रखा है, देश में अल्पसंख्यक हिन्दू तमिलों की प्रमुखता वाले उत्तरी क्षेत्र में एक स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना के लिए हिंसात्मक विद्रोह कर रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में, श्री लंका की सेना ने तमिल टायगर्स के नियंत्रण वाले एक बड़े भाग पर अधिकार कर लिया है और उन्हें देश के उत्तर के छोटे हो रहे क्षेत्र तक सीमित कर दिया है.
दोनों सेनाओं के बीच के क्षेत्र के छोटे से हिस्से में फंसे हुए वहां रहने वाले लोग अधिकतर तमिल हैं. रेड क्रौस की अंतर्राष्ट्रीय समिति, जो ऐसा एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठन है जिसे युद्ध क्षेत्र में जाने की अनुमति है, उसके अनुसार “सैकड़ों तमिल मार डाले गए हैं, कुछ लोग दोनों पक्षों से हो रही गोलीबारी के बीच फंस जाते हैं, तोपों के गोले आकर ऐंबुलेंसों और अस्पतालों पर लगते हैं । भयभीत लोगों को सुरक्षा, चिकित्सीय देखभाल और बुनियादी सहायता की आवश्यकता है.”
श्री लंका सेना ने विद्रोहियों पर आरोप लगाया है कि वह नागरिकों का इस्तेमाल मानवीय ढाल के रूप में करते हैं, जबकि सरकारी सैनिकों पर तमिल टायगरों का आरोप है कि वह युद्ध क्षेत्र में अंधाधुंध गोलाबारी करते हैं.
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि वह तब तक लड़ाई रोक दें जब तक अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रौस घायलों को वहां से हटा नहीं लेता और राष्ट्रसंघ वहां खाद्यान्न नहीं पहुंचा देता. श्री लंका के पुनर्निर्माण और विकास के लिए टोक्यो सम्मेलन के सह अध्यक्ष-योरोपीय संघ, जापान, अमरीका और नौर्वे ने एक संयुक्त विज्ञप्ति में कहा “लिबरेशन टायगर्स औफ़ तमिल ईलम और श्री लंका सरकार को यह समझना चाहिए कि और अधिक नागरिकों और सैनिकों के जीवन जाने से कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकेगा.” एक संयुक्त वक्तव्य में अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन और ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने टोक्यो सह-अध्यक्षों की विज्ञप्ति का स्वागत करते हुए कहा “हम दोनों पक्षों से आह्वान करते हैं कि वह लड़ाई में फंसे लोगों तक खाद्यान्न और चिकित्सीय सहायता पहुंचना सुलभ बनाएं, जिन लोगों को आपत्कालीन चिकित्सीय सेवा की आवश्यकता है उन्हें हटाने में अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रौस की सहायता करें और सहायता तथा चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित कराएं.” उन्होंने आगे कहा “लिबरेशन टायगर्स औफ़ तमिल ईलम और श्री लंका सरकार को सशस्त्र संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करना चाहिए.”