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| NATO Secretary General Jaap de Hoop Scheffer (C) chairs a NATO working dinner in Baden-Baden, Germany, 03 Apr 2009 |
नॉटो’ यानी उत्तर अटलांटिक संधि संगठन अपने गठन की साठवीं वर्षगांठ मना रहा है। अपने गठन के बाद से नॉटो यूरोप को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से एकजुट रखने में सफल रहा है।
पहले इसकी जिम्मेदारी केवल यूरोप की सीमाओं के अंदर सुरक्षा बनाये रखने भर की ही थी। लेकिन अब संगठन को ये अहसास हो गया है कि खतरा पूरी दुनिया में कंही से भी आ सकता है। इसीलिये संगठन न केवल सदस्य देशों की सुरक्षा की वचनबद्धता को दोहरा रहा है बल्कि अफ़गानिस्तान को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ साइबर आतकंवाद से भी निपटने को तैयार है।
सोवियत संघ के खतरे से निपटने के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के 12 मित्र देशों ने चार अप्रैल 1949 को वॉशिंगटन डी.सी. में नॉटो का गठन किया था। पहले नॉटो मूलत: राजनीतिक संगठन था लेकिन सोवियत संघ से बढ़ते खतरे को देखते हुए सदस्य देशों को संयुक्त सेना तैयार करनी पड़ी।
बाद के दशकों में नॉटो ने सोवियत संघ और वारसा संधि से उत्पन्न होने वाले खतरे से सदस्य देशों की सफलतापूर्वक रक्षा की तो इसकी सदस्य संख्या भी बढ़ी। लेकिन 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने और सोवियत संघ का विघटन होने के बाद संगठन की सदस्यता के दरवाज़े पूर्वी यूरोप के देशों के लिये भी खुल गये और क्रोशिया और अल्बानिया के शामिल होने से सदस्य संख्या 28 तक पंहुच गई है। इसके अलावा नब्बे के दशक से ही नॉटो रूस के साथ भी सहयोग बढ़ा रहा है।
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक लिखित संदेश में कहा: “पिछले छ: दशकों से नॉटो ट्रॉंस-अटलॉंटिक सुरक्षा का आधार रहा है और अमेरिका इसकी सफलता के लिए कटिबद्ध है। हमें अहसास है कि सहयोगियों और मित्रों के साथ सहयोग बढ़ा कर ही हम अपनी सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।”
Key Words: NATO, Europe, 60th Anniversary