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| Women's rights activists in Iran |
पहली नजर में किसी को भी ये लग सकता है कि ईरानी महिलायें अन्य पड़ोसी देशों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में हैं। उन्हें वोट देने का अधिकार है, वे संसद की सदस्य हैं और शिक्षा हासिल करने के मामले में महिलायें कई मायनों में पुरुषों से बेहतर स्थिति में है....विश्वविद्यालय की शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों में उनकी संख्या 60 प्रतिशत है।
लेकिन ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता रोया बोरोमंद के अनुसार तीस साल पहले ईरानी महिलायें समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं...लेकिन अब वे कड़े कानूनों की वजह से उत्पीड़न का शिकार हैं।
“विवाह, तलाक, शिक्षा, बच्चों के अभिभावकत्व के अधिकार, संपत्ति उत्तराधिकार सहित जीवन के कई अहम क्षेत्रों में महिलाओं के साथ भेदभाव होने से उनका विकास रुक सा गया है।”
ईरानी महिलायें शांतिपूर्ण ढंग से इसका विरोध भी कर रही हैं। ‘बराबरी के लिए अभियान’ जैसे अभियान चलाकर जिसमें ईरानी महिलाओं को उनके क़ानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाती है।
अभियान का उद्देश्य भेदभाव भरे कानूनों में परिवर्तन के लिये दस लाख हस्ताक्षर जुटा कर सरकार पर दबाव बनाना है।
लेकिन सरकार इस अभियान को सख्ती से कुचलने में लगी है। और कार्यकर्ताओं को पीटने, जेल भेजने, जुर्माना लगाने और कोड़े मारने जैसे तरीके अपना रही है।
अभियान का समर्थन करने वाली वेबसाइट्स को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रोया बोरोमंद कहती हैं कि “सरकार द्वारा दमनकारी नीति अपनाने की वजह साफ है कि यह अभियान काफी कारगर रहा है। और यह केवल राजधानी तेहरान की मुट्ठी भर अभिजात्य महिलाओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश भर में फैली महिलाओं को सजग बनाने में सफल हुआ है।”
“महिलाओं की गतिविधियों को निशाना बनाने की सबसे बड़ी वजह भी यही है कि सरकार किसी भी ऐसे अभियान को बर्दाश्त नहीं कर सकती है जो सरकारी विचारधारा से मेल तो नहीं खाता है परंतु सुव्यवस्थित और प्रभावी है।”
ईरानी महिलाओं की अपने अधिकार हासिल करने की शांतिपूर्ण और साहसिक पहल का अमरीका समर्थन करता है। विदेश सचिव हिलरी रोढम क्लिन्टन का कहना है “जब महिलाओं को उनके मौलिक अधिकार दिये जाते हैं...तो उनका विकास तो होता ही है...इसके साथ-साथ उनकी संतानो और परिवार का भी विकास होता है...साथ ही समुदाय और समाज का भी भला होता है।”
Key Words: ran, Women, Rights